गाजीपुर-जमानिया-सैयदराजा ग्रीनफील्ड फोरलेन अब 81 किमी लंबी, नई सड़क से बिहार और लखनऊ तक कनेक्टिविटी
/file/upload/2026/01/8999134246291759487.webpपूर्वांचल एक्सप्रेसवे से गाजीपुर तक मौजूदा सड़क को एक्सेस कंट्रोल करते हुए बढ़ाई जाएगी लंबाई। सांकेतिक तस्वीर
संग्राम सिंह, वाराणसी। गाजीपुर-जमानिया-सैयदराजा ग्रीनफील्ड फोरलेन प्रोजेक्ट में बड़ा बदलाव हुआ है। पहले करीब 42 किलोमीटर की परियोजना प्रस्तावित की गई थी, लेकिन अब कुल लंबाई करीब 81 किलोमीटर होगी। यह सड़क बनने के बाद गाजीपुर से चंदौली जाने के लिए वाहनों को बनारस नहीं आना होगा, वह इसी रास्ते चंदौली होते हुए बिहार, लखनऊ व दिल्ली की तरफ जा सकेंगे। परियोजना से वाराणसी रिंग रोड और शहर में वाहनों का लोड कम किया जा सकेगा। गोरखपुर की तरफ से आने वाले वाहनों को रिंग रोड पर नहीं आना होगा, वाहनों को लंबा फेरा बचेगा। चंदौली, गाजीपुर, मऊ, बलिया और बिहार के लोगों को फायदा होगा और नए उद्योगों के विकास व रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) फाइनल हो चुका है। योजना है कि वाराणसी-गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से गाजीपुर तक करीब 30 किलोमीटर पुरानी सड़क एक्सेस कंट्रोल होगी, इसे सुदृढ़ किया जाएगा। इसके बाद गाजीपुर से जमानिया होते हुए सैयदराजा (चंदौली) तक करीब 51 किलोमीटर फोरलेन सड़क ग्रीनफील्ड बनाई जाएगी। इस प्रोजेक्ट को निर्माणाधीन वाराणसी-रांची-कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना से भी जोड़ दिया जाएगा। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने प्रोजेक्ट स्वीकृत कर दिया है। इस माह केंद्र सरकार में कैबिनेट की पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप कमेटी की अंतिम मुहर लग जाएगी। करीब 3100 करोड़ रुपये में कार्य पूर्ण होगा, इसमें 1700 करोड़ से सड़क बनेगी जबकि बाकी धनराशि जमीन खरीदने में खर्च की जाएगी। करीब 261 हेक्टेयर भूखंड खरीदी जाएगी, इसके लिए 30 से अधिक गांवों के किसान प्रभावित होंगे। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मार्च से सड़क का निर्माण शुरू करने की तैयारी है।
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अत्यधिक ट्रैफिक की वजह से लगता है जाम
गाजीपुर से जमानिया होते हुए सैयदराजा (चंदौली) तक वर्तमान सड़क सात मीटर चौड़ी है, अत्यधिक ट्रैफिक की वजह से सड़क पर जाम की समस्या गंभीर है। यह सड़क नई हरी-भरी भूमि पर बनाई जा रही है, जो शहरी क्षेत्रों से बचते हुए सीधी और समतल सड़क प्रदान करेगी।
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एक्सेस-कंट्रोल सड़क के मायने
एक्सेस-कंट्रोल हाईवे पर एंट्री प्वाइंट सीमित होते हैं, ठीक वैसे ही जैसे एक्सप्रेसवे में होते हैं, इससे उच्च गति वाली सड़क यातायात के सुरक्षित व निर्बाध होगी। वाहन सड़क पर कहीं से भी सीधे प्रवेश या निकास नहीं कर सकेंगे। प्रवेश और निकास केवल निर्धारित इंटरचेंज, रैंप या नियंत्रित स्थानों से ही संभव होगा। ऐसे मेें आसपास की स्थानीय सड़कों या निजी संपत्तियों को सीधे इस सड़क से जुड़ने की अनुमति नहीं होगी।
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