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गोरखपुर में आवारा कुत्तों को खिलाने और दवा पर खर्च होंगे रोजाना 5-6 लाख, बनेगा शेल्टर होम

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कुत्तों के खुराक पर रोजाना 50 रुपये तो दवा पर पांच रुपये होंगे खर्च। जागरण



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। नगर निगम शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। निगम ने 7000 क्षमता वाला आधुनिक शेल्टर होम बनाने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। इस शेल्टर होम के निर्माण पर करीब 29 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

हालांकि, निर्माण के बाद इसका संचालन नगर निगम के लिए आर्थिक रूप से बड़ी चुनौती साबित हो सकता है, क्योंकि केवल कुत्तों को खिलाने और उनके इलाज पर ही रोजाना 5 से 6 लाख रुपये खर्च होने की संभावना जताई जा रही है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारने इसके वित्तीय प्रबंधन संबंधी नगर निगम के सामने चुनौती होगी।

29 करोड़ से बनेगा आधुनिक शेल्टर होम
नगर निगम के प्रस्ताव के अनुसार डाग शेल्टर के निर्माण के लिए लगभग 15.75 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी। शेल्टर होम के निर्माण पर करीब 29 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह शेल्टर न केवल आवारा कुत्तों को सुरक्षित स्थान प्रदान करेगा, बल्कि उनके इलाज, भोजन और देखभाल की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित करेगा।

शेल्टर के निर्माण के बाद उसके संचालन और रखरखाव पर हर साल करीब 16.92 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। शेल्टर होम को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि एक साथ 7000 कुत्तों को सुरक्षित और मानवीय तरीके से रखा जा सके।

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शहर में 70 हजार आवारा कुत्तों का अनुमान
नगर निगम के आकलन के अनुसार, गोरखपुर शहर में करीब 70 हजार आवारा कुत्ते हैं। इनमें से चरणबद्ध तरीके से कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में रखने की योजना है। फिलहाल नगर निगम की ओर से एक शेल्टर होम प्रस्तावित है, जिसे आने वाले समय में और बढ़ाया जाएगा। निगम का मानना है कि इससे सड़कों पर आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित होगी और काटने की घटनाओं में भी कमी आएगी। फिलहाल शहर में वैक्सीनेशन और नसबंदी अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन बढ़ती संख्या के कारण समस्या पूरी तरह काबू में नहीं आ पा रही है।

खाने और इलाज पर तय किया गया खर्च
शेल्टर होम में सबसे अधिक खर्च कुत्तों के भोजन और दवा पर होगा। प्रतिदिन प्रति कुत्ता 50 रुपये के हिसाब से सालाना करीब 12.77 करोड़ रुपये केवल खाने पर खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा, दवाइयों पर 1.27 करोड़ रुपये, डिवार्मिंग पर 28 लाख रुपये और टीकाकरण पर 1.05 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया है।

कुत्तों की देखभाल के लिए पर्याप्त मानव संसाधन की भी व्यवस्था की जाएगी। मुख्य पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डा. रोबिन चंद्रा ने बताया कि प्रस्ताव में सात पशु चिकित्सक, दो फार्मासिस्ट, 14 पैरावेट और 33 सफाईकर्मियों की नियुक्ति शामिल है, जिस पर सालाना करीब 1.54 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों पर फोकस
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह योजना केवल कुत्तों की देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरवासियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से भी जुड़ी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रम में आवारा कुत्तों के हमले, रेबीज जैसी बीमारियों का खतरा और ट्रैफिक दुर्घटनाओं में उनकी भूमिका को देखते हुए यह कदम जरूरी हो गया है। शेल्टर होम में कुत्तों की नियमित जांच, टीकाकरण और इलाज की व्यवस्था की जाएगी।


कुत्तों के शेल्टर होम और उनके खिलाने व इलाज पर आने वाले खर्च संबंधी गाइडलाइन है। इसके लिए शासन से बजट मांगा जाएगा।
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-प्रमोद कुमार, अपर नगर आयुक्त
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