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नए साल पर बौद्ध स्तूप बना खेल का मैदान, बच्चों ने चढ़कर मचाया हुड़दंग; पुलिस बनी मूकदर्शक

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नए साल पर बौद्ध स्तूप बना खेल का मैदान



संवाद सूत्र , बेतिया। नववर्ष के पहले दिन लौरिया नंदनगढ़ बौद्ध स्तूप का दीदार करने के लिए 50 हजार से भी अधिक पर्यटक व स्थानीय लोग पहुंचे। बौद्ध स्तूप पर चढ़ने की मनाही के बाद भी हजारों लोग स्तूप पर चढ़कर धमाल मचाए। बौद्ध स्तूप पर पर्यटक चढ़कर नाच गान व शोर मचा रहे थे और पुलिस ताकती रह गई। चूंकि पुलिस किसी को बेवजह नए साल पर परेशान करना नहीं चाहती थी।विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

सुबह से ही पर्यटकों की भीड़ विश्वप्रसिद्ध बौद्ध स्तूप नंदनगढ़ पर नववर्ष के प्रथम दिन पहुंचने लगा था। सुबह से शाम तक हजारों पर्यटकों का आना जाना लगा रहा। पूरा परिसर पर्यटकों से गुलज़ार रहा।
50 हजार से भी अधिक पर्यटक पहुंचे

सुबह में ठंड के बावजूद पर्यटकों का जोश भारी पड़ा था , उसके बाद धूप खिलते ही सैलानियों की भीड़ का कारवां बढ़ता गया।करीब 50 हजार से भी अधिक पर्यटक नंदनगढ़ पहुंचकर मौज मस्ती के साथ पिकनिक मनाए।

सैकड़ों पर्यटक घर से गैस चूल्हा और खाना का सामान लेकर पहुंचे थे । सबसे अधिक मस्ती युवक और युवतियों ने किया और उनमें सेल्फी लेने की होड़ लगी थी। इस बार बौद्ध स्तूप पर पुलिस की काफी संख्या थी , जिससे पर्यटक भी निश्चिन्त होकर नंदनगढ़ का जमकर दीदार किए।
नेपाल से भी आए थे सैलानी

नेपाल से पहुंचे परमेंद्र थापा, बीरगंज से आए विजय कुर्ला सपरिवार बौद्ध स्तूप नंदनगढ़ पिकनिक मनाने आए हुए थे तो यूपी के देवरिया के रुद्रपुर अनुमंडल से नंदनगढ़ पहुंचे सुरेन्द्र त्रिपाठी, पत्नी ऊषा त्रिपाठी बहु सुष्मिता, बेटा ज्ञानेंद्र आदि भी पहुंचे थे तो सीतामढ़ी के अनुराग सिंह, आजमगढ़ से सरदार गुरप्रीत सिंह मनिंद्र सिंह आदि ने बताया कि यहां आकर हमसब बहुत खुश हैं और यह स्तूप पर्यटकों को लुभाने के लिए बहुत अच्छा है।
नंदनगढ़ परिसर में तीन पीढ़ियों ने मनाया पिकनिक

नववर्ष पर बगहा एक प्रखंड के एक परिवार की तीन पीढ़ियां सामूहिक रूप से पिकनिक मनाने ऐतिहासिक लौरिया नंदनगढ़ पहुंची। परिवार के मुखिया 75 वर्षीय चंद्रिका प्रसाद, उनकी पत्नी गोदावरी देवी, पुत्र छोटेलाल कुमार, बहू निर्मला देवी तथा पोता आर्यन के साथ पिकनिक मनाया।

दादा-दादी ने पोते आर्यन को नंदनगढ़ के ऐतिहासिक महत्व के बारे में बताया और पुराने समय की स्मृतियां साझा की। पिकनिक के दौरान परिवार ने साथ बैठकर भोजन किया और प्राकृतिक वातावरण का आनंद लिया।
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