मिलती रही तारीख पे तारीख... नहीं मिल सका तो गंगाजल, हैरान कर देगी गाजियाबाद की ये रिपोर्ट
/file/upload/2026/01/7739196395897390946.webpजागरण संवाददाता, साहिबाबाद (गाजियाबाद)। गंगाजल के लिए लोगों को तारीख पे तारीख मिलती रही। कभी चुनावों के दौरान तो कभी धरना-प्रदर्शन खत्म कराने के दौरान आश्वासन मिलता रहा, लेकिन वर्षों बाद भी इस समस्या का समाधान नहीं हो सका।
स्थिति ये है कि अगर लोग पानी न खरीदें तो प्यासे ही रहें। लगातार आश्वासन मिलने के बाद भी खोड़ा में पानी की मांग पूरी नहीं हो सकी। आज लोग एक-एक पानी की बूंद के लिए तरस रहे हैं।
लोगों का कहना है कि नगर पालिका परिषद खोड़ा में 70 टैंकरों से जलापूर्ति करने के दावे करती हैं, लेकिन तीन से चार दिन में ही टैंकर दिखाई देता है। इसके बाद पानी के लिए लंबी लाइन लगानी पड़ती है, लेकिन जब तक नंबर आता है तब तक पानी खत्म हो चुका होता है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
नगर पालिका टैंकरों से जलापूर्ति करने के लाख दावे करती रहे, लेकिन यहां के लोगों को रोजाना बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। आखिर में दुकानों से बोतलबंद पानी खरीदकर ही गुजारा करना पड़ता है।
लोगों का कहना है कि जब भी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों के पास जाते हैं तो वह गंगाजल आपूर्ति की प्रक्रिया जारी होने की बात कहते हैं। फिर से जाते हैं तो वही बात दोहराते हैं। इसके बाद स्थिति जस की तस बनी रहती है। लोगों का कहना है कि अगर पानी की आपूर्ति शुरू हो जाएगी तो 90 प्रतिशत परेशानी खत्म हो जाएगी।
सुबह से ही शुरू हो जाता है पानी खरीदने का सिलसिला
खोड़ा के लोगों को सुबह से ही पानी खरीदना पड़ता है। जरूरी कार्यों से लेकर पीने तक के लिए कई बार बोतलबंद पानी से ही गुजारा करना पड़ता है। इससे हर माह का बजट खराब हो जाता है। जो रुपये दूसरे कार्यों के लिए होते हैं वह पानी खरीदने पर खर्च करने पड़ते हैं।
पानी माफिया ने घरों में लगा रखे हैं मीटर
जलापूर्ति के लिए पानी माफिया ने मीटर भी लगा रखे हैं, जिससे यह पता चल जाता है कि किसने कितना पानी खर्च किया गया। खपत के हिसाब से ही लोगों से वसूली की जाती है।
प्रशासन जब भी खोड़ा में गंगाजल आपूर्ति के लिए योजना बनाता है, वह कागजों में ही सिमट कर रह जाती है। अभी अगले कई वर्षों तक गंगाजल मिलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। - अशोक कुमार, स्थानीय निवासी
छोटे-छोटे कार्य के लिए पानी खरीदकर ही गुजारा करना पड़ता है। पीने के लिए प्लांटों व दुकानों से पानी खरीदना पड़ता है और जरूरी कार्यों के लिए टैंकर वालों से खरीदते हैं। - कुलदीप कुमार, स्थानीय निवासीय
एक भी दिन ऐसा नहीं होता जब पानी खरीदना न पड़े। इससे हर माह जरूरी कार्यों पर खर्च होने वाले रुपये पानी पर खर्च हो जाते हैं। इससे परेशानी बढ़ जाती है। -अंशुल बाल्यान, स्थानीय निवासी
नगर पालिका जो टैंकर भेजती है उनसे पानी मिलेगा या नहीं, इसकी कोई पता नहीं होता है। जब से खोड़ा में आए हैं पानी खरीदकर गुजारा करना पड़ रहा है। - पंकज गोयल, स्थानीय निवासी
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