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हिमाचल: पंचायतों में BPL सूची की छंटनी से लोगों में हड़कंप, 10 प्रतिशत का भी नहीं हो पाया दोबारा चयन; आखिर क्या वजह?

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हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में बीपीएल सूची में छंटनी हुई है। प्रतीकात्मक फोटो



संवाद सहयोगी, जसवां परागपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बीपीएल और अंत्योदय सूचियों के पुनर्गठन की प्रक्रिया के बाद हड़कंप मच गया है। प्रशासन की इस बड़ी कार्रवाई के अंतर्गत जसवां परागपुर और देहरा विधानसभा क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर परिवारों की छंटनी की गई है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
जसवां परागपुर में 278 परिवार ही रहे पात्र

जसवां परागपुर विधानसभा क्षेत्र में जहां पहले 3237 परिवार इस श्रेणी में पंजीकृत थे, वहीं अब केवल 278 परिवार ही सरकारी मानकों पर पात्र पाए गए हैं और 2959 परिवारों को सूची से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
देहरा में मात्र 195 परिवारों को जगह

इसी प्रकार देहरा विधानसभा क्षेत्र में 3946 परिवारों में से मात्र 195 परिवारों का चयन किया गया है, जबकि 3751 परिवारों का नाम सूची से हटा दिया गया है। इस भारी कटौती के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के निर्धन परिवारों में गहरा रोष व्याप्त है और पंचायत प्रतिनिधियों ने भी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
कोरम पूरा न होने पर कमेटी को दिया था अधिकार

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान ग्राम सभाओं का कोरम पूरा न होने के कारण सरकार ने उपमंडल अधिकारी, खंड विकास अधिकारी और पंचायत निरीक्षक की एक विशेष खंड स्तरीय कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी को 31 दिसंबर 2025 तक सूचियों को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए थे।
क्या नई गाइडलाइन ने बाहर किए परिवार

चयन के लिए निर्धारित की गई नई गाइडलाइन और जटिल शर्तों को इस भारी छंटनी का मुख्य कारण माना जा रहा है। सरकार द्वारा लागू की गई नई शर्तों के अनुसार यदि किसी परिवार के पास एक पक्का कमरा है या परिवार में 18 से 59 वर्ष की आयु का कोई पुरुष सदस्य है तो उसे अपात्र घोषित कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त भूमि की सीमा को भी दो हेक्टेयर से घटाकर एक हेक्टेयर कर दिया गया है जिससे असंख्य सीमांत किसान परिवार इस सुविधा से वंचित हो गए हैं।
क्या कहते हैं पंचायत प्रतिनिधि

स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि इस चयन प्रक्रिया में निर्वाचित प्रधानों को शामिल नहीं किया गया और केवल सचिव, पटवारी तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लिए गए। घियोरी, जंडौर और वणी पंचायतों के प्रधानों ने स्पष्ट किया है कि 50 हजार रुपये की वार्षिक आय वाले परिवारों को भी सूची से बाहर कर दिया गया है जो न्यायसंगत नहीं है।

उदाहरण स्वरूप घियोरी पंचायत में 182 परिवारों में से केवल 5 परिवारों को ही बीपीएल में स्थान मिला है। अधिकारियों का तर्क है कि समस्त चयन सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर ही किया गया है परंतु धरातल पर गरीब और असहाय परिवारों को इस नई व्यवस्था से भारी झटका लगा है।
क्या कहते हैं अधिकारी

खंड विकास अधिकारी परागपुर अशोक कुमार का कहना है कि निर्धारित लक्ष्य से कम परिवारों ने बीपीएल में शामिल होने के लिए आवेदन किया था, जिसमें 278 परिवार पात्र पाए गए हैं।

देहरा के समाज शिक्षा एवं खंड योजना अधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि देहरा विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों से 195 परिवारों का बीपीएल में चयन किया गया है। लक्ष्य से बहुत कम परिवारों ने बीपीएल में शामिल होने के लिए आवेदन किया था। बीपीएल में चयन सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार किया गया है।

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