ओडिशा में दरकने लगा BJD का 25 वर्षों का किला: संगठन पर बीजेपी का फोकस, कांग्रेस में अब भी नेतृत्व संकट
/file/upload/2026/01/626135242925179502.webpशेषनाथ राय, भुवनेश्वर। ओडिशा में पिछले 25 वर्ष तक मजबूत किला के रूप में अपना राजनीतिक दबदबा रखने वाली पार्टी बीजू जनता दल का किला सत्ता जाने के साथ ही धीरे-धीरे दरकने लगा है। बीजद का गढ़ माने जाने वाले जाजपुर जिले के साथ पूरे प्रदेश में पार्टी की स्थिति डगमगाने लगी है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
नई सरकार के आने के महज 500 दिनों के भीतर ही यह किला ढहने लगा है। पार्टी के हाथों से ब्लॉक अध्यक्ष पद खिसक रहे हैं। वार्ड से लेकर पंचायत और जिला परिषद तक जमीनी स्तर पर बीजद के नेता और कार्यकर्ता भाजपा की ओर रुख कर रहे हैं।यह स्थिति ओडिशा के जाजपुर जिले में ज्यादा देखी जा रही है।
जिले की सातों विधानसभा सीटों पर बीजद की स्थिति दिन-ब-दिन कमजोर होती जा रही है।कोरेई, सुकिंदा, बड़चणा और धर्मशाला के विधायकों के प्रयासों से भाजपा ने अपने संगठन का विस्तार करने में फिलहाल सफलता हासिल की है। दूसरी ओर, पिछले चुनाव में सातों विधानसभा सीटों पर जमानत गंवा चुकी कांग्रेस पार्टी पहले की तरह ही हाशिये पर पड़ी हुई है। संगठनात्मक गतिविधियों की कमी और नेतृत्व संकट कांग्रेस को आगे बढ़ने नहीं दे रहा है।
वर्ष 2004 में कोरेई विधानसभा सीट से पहली बार भाजपा ने जीत दर्ज की थी।पार्टी की ओर से स्वर्गीय संचिता महंती विधायक चुनी गई थीं। 2009 में बीजद-भाजपा गठबंधन टूटने के बाद बीजद ने अकेले दम पर अपना वर्चस्व कायम रखते हुए 2014 और 2019 के आम चुनावों में जिले की सभी विधानसभा सीटों और लोकसभा सीट पर कब्जा कर लिया था। लेकिन 2024 के आम चुनाव आते-आते स्थिति पूरी तरह बदल गई।
बीजद में पांडियन के प्रवेश और प्रभाव बढ़ने के साथ ही जिले की कुछ विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों के बदलाव ने जिला राजनीति का गणित बदल दिया।पार्टी के भीतर गुटबाजी तेज हो गई।
नतीजतन 2024 के आम चुनाव में बीजद को बड़चणा, धर्मशाला, सुकिंदा और कोरेई जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। लोकसभा सीट भी भाजपा के हाथ चली गई। अब धर्मशाला, बड़चणा, बारी और कोरेई में बीजद के अधिकांश नेता और निर्वाचित प्रतिनिधि भाजपा में शामिल हो चुके हैं, जिससे भाजपा का संगठन मजबूत हुआ है। बारी, बड़चणा और धर्मशाला में ब्लॉक अध्यक्ष भाजपा के साथ हैं। अन्य ब्लॉकों में भी इसका असर दिखने लगा है। जल्द ही जिला परिषद सदस्य भी भाजपा की ओर झुक सकते हैं, इसके लिए पार्टी ने प्रक्रिया शुरू कर दी है।
बीजद के वरिष्ठ नेता प्रणव प्रकाश दास अब खुद को केवल कोरेई और जाजपुर सीट तक सीमित रखे हुए हैं। इसी तरह प्रीतिरंजन घड़ेई भी अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर प्रभाव नहीं जमा पा रहे हैं।बिंझारपुर की विधायक प्रमिला मलिक, बारी के विधायक विश्वरंजन मलिक, जाजपुर सदर की विधायक सुजाता साहू और राज्यसभा सांसद सुलता देव ने भी अपना दायरा सीमित कर लिया है।
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पूर्व मंत्री प्रफुल्ल चंद्र घड़ेई और बड़चणा के पूर्व विधायक अमर प्रसाद शतपथी लोगों के संपर्क में बने हुए हैं।इनकी भूमिका जिला राजनीति में आगे भी प्रभावशाली रह सकती है। हालांकि, बीजद के इस संकट के दौर में कांग्रेस जिस अवसर का लाभ उठा सकती थी, वह ऐसा कर पाने में असफल रही है। बीजद से मुंह मोड़ रहे नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस की ओर नहीं जा रहे हैं। इसके लिए नेतृत्व संकट को जिम्मेदार माना जा रहा है।
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