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मुजफ्फरपुर में पुलिस साक्ष्य के अभाव में चिट फंड कंपनी के आरोपितों को कोर्ट से जमानत

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इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।



जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। अहियापुर के कोल्हुआ पैगंबरपुर में पकड़े गए चिट फंड कंपनी के चार कर्मियों को कोर्ट ने जमानत मिल गई है। पुलिस आरोपितों के विरुद्ध ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी। इसका लाभ उनको गया।

इससे पीड़ित लोगों में पुलिस की कार्यशैली को लेकर नाराजगी है। उनका कहना था कि कर्ज पर रुपये लेकर नौकरी के लिए दो-दो लाख तक दिए थे। दो महीने नौकरी मिलने की उम्मीद में ट्रेनिंग भी की। न नौकरी मिली और न रुपये।

पुलिस कार्रवाई कर फर्जी तरीके से नौकरी का झांसा देने वाले लोगों पर शिकंजा कसने से भी दूर रही। अब तक आरोपित मकान मालिक को भी गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।

मालूम हो कि नेपाल के रंजीत कापड़ की शिकायत पर अहियापुर पुलिस ने 24 नवंबर को प्राथमिकी की थी। इससे पहले कार्यालय का घेराव करने व संचालकों को बंधक बनाने की सूचना पर पुलिस ने नौकरी के नाम पर ठगी करने के आरोप में नेपाल के काबे जिला के दहन बहादुर मल्ला गांव का सुजन दुनगाना, दैलेख जिला के नारायण नगर पालिका टू का हेमराज मल्ला, तल्हू जिला के रामपुर गांव का यशराम तमांड व चंद्रवती पोखरी थाने के भानुनगर गांव का भरत अधिकारी को गिरफ्तार किया था।

इन लोगों को प्राथमिकी में आरोपित बनाने पर पुलिस ने सभी को जेल भेजा था। एसडीपीओ टू विनीता सिन्हा के आदेश पर मजिस्ट्रेट गठित कर कार्यालय को सील किया गया था। जेल भेज गए आरोपितों के विरुद्ध साक्ष्य जुटाने से पुलिस दूर रही है। इससे आरोपितों को कोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी। पीड़ितों में नेपाल के अलावा दार्जिलिंग व सिलीगुड़ी के भी युवक थे।
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