Chikheang Publish time Half hour(s) ago

लूट के मामले में दिल्ली HC ने बरी के आदेश में दखल से किया इनकार, डबल प्रिजम्पशन ऑफ इनोसेंस का सिद्धांत दोहराया

/file/upload/2026/01/7844623526905242135.jpg

प्रतीकात्मक तस्वीर।



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने लूट के एक मामले में आरोपित को बरी करने से जुड़े सत्र अदालत के वर्ष 2014 के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा है कि अपीलीय अदालत केवल उसी स्थिति में हस्तक्षेप कर सकती है, जब निचली अदालत के निष्कर्ष विकृत या कानून के विपरीत हों।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी अभियोजन पक्ष की उस अपील पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें नवंबर 2014 में पारित बरी किए जाने के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने डबल प्रिजम्पशन ऑफ इनोसेंस यानी निर्दोषता की दोहरी धारणा के सिद्धांत को रेखांकित करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला ठोस तर्कों और साक्ष्यों पर आधारित था।

अदालत ने कहा कि कानून का स्थापित सिद्धांत है कि बरी किए जाने के खिलाफ दायर अपील में अपीलीय अदालत को अत्यंत संयम बरतना चाहिए और तभी दखल देना चाहिए, जब ट्रायल कोर्ट के निष्कर्ष स्पष्ट रूप से त्रुटिपूर्ण या मनमाने हों।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि डबल प्रिजम्पशन ऑफ इनोसेंस दो स्तरों पर लागू होता है। पहला, आपराधिक न्यायशास्त्र का मूल सिद्धांत कि किसी भी व्यक्ति को दोष सिद्ध होने तक निर्दोष माना जाता है और दूसरा, जब किसी आरोपी को अदालत द्वारा बरी कर दिया जाता है, तो उसकी निर्दोषता की यह धारणा और अधिक मजबूत हो जाती है।

ट्रायल कोर्ट के निष्कर्षों से सहमति जताते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि दिल्ली पुलिस आरोपित के खिलाफ संदेह से परे अपराध साबित करने में विफल रही। अदालत ने बरी करने के आदेश को संभव, तर्कसंगत और साक्ष्यों से समर्थित बताते हुए अभियोजन की अपील खारिज कर दी।

यह भी पढ़ें- दुष्कर्म के झूठे मामलों पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, कहा-निर्दोषों पर जिंदगीभर के घाव छोड़ते हैं ऐसे आरोप
Pages: [1]
View full version: लूट के मामले में दिल्ली HC ने बरी के आदेश में दखल से किया इनकार, डबल प्रिजम्पशन ऑफ इनोसेंस का सिद्धांत दोहराया

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com