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इंदौर दूषित पानी मामला: मेयर ने जताई बेबसी, बोले- अधिकारी सुनते नहीं, ऐसे सिस्टम में काम नहीं कर सकता

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मेयर ने जताई बेबसी, बोले- अधिकारी सुनते नहीं, ऐसे सिस्टम में काम नहीं कर सकता (फोटो- जेएनएन)



जेएनएन, इंदौर। देश के सबसे स्वच्छतम शहर इंदौर में दूषित पेयजल से 15 लोगों की मौत और एक हजार से अधिक लोगों के बीमार होने के लिए इंदौर के महापौर और नगर निगम के अधिकारियों के बीच समन्वय के अभाव की बात भी सामने आई है।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों के रवैये पर खुलकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बेबसी जताते हुए है कहा- \“अधिकारी सुनते नहीं हैं। मैं ऐसे सिस्टम में काम नहीं कर सकता।\“

महापौर की इस बात पर अपत्ति दर्ज कराते हुए मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने शुक्रवार को इंदौर के भाजपा नेताओं को घेरा। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यह कौन कह रहा है कि हमारी चली नहीं। जब आपकी नहीं चली तो आप पद पर बैठे हुए बोतलबंद पानी क्यों पीते रहे? पद छोड़कर जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचे? ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता। या तो प्रायश्चित या दंड।

गुरुवार को शहर की रेसीडेंसी कोठी में प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की मौजूदगी में हुई बैठक में महापौर भार्गव का दर्द बाहर आया। उन्होंने शासन में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) संजय दुबे से कहा मैं किस काम का महापौर हूं। क्या इसके लिए राजनीति में नहीं आया था। फैसलों का ही पालन नहीं हो रहा।

अधिकारियों की वजह से काम प्रभावित हो रहा है। अधिकारी बता दें कि कितनी बार फोन करना पड़ेगा? कहेंगे तो सौ बार फोन लगाऊंगा। मैं ऐसे सिस्टम में काम नहीं कर सकता। आप मुख्यमंत्री तक यह संदेश पहुंचा दो। एसीएस दुबे ने कहा कि इंदौर नगर निगम को कुछ और अधिकारी दे देते हैं।

इस पर महापौर ने कहा कि अधिकारियों की कमी नहीं है। जो अधिकारी हैं, वे ईमानदारी से काम कर लें तो स्थिति सुधर जाएगी। अधिकारी काम ही नहीं करना चाहते हैं। बैठक में कुछ पार्षदों ने शिकायत की कि अधिकारियों की कार्यशैली की वजह से मारपीट की नौबत तक आ जाती है।
सभी जिम्मेदार लोग जनता के प्रति अपराध के कटघरे में खड़े हैं: उमा भारती

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने एक के बाद एक एक्स पर तीन पोस्ट कीं। उन्होंने कहा कि साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारा प्रदेश, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गई हैं।

प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का अवार्ड प्राप्त करने वाले नगर में इतनी बदसूरती, गंदगी, जहर मिला पानी, जो कितनी जिंदगियों को निगल गया और निगलता जा रहा है, मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। जिंदगी की कीमत दो लाख रुपये नहीं होती, क्योंकि उनके परिजन जीवनभर दुख में डूबे रहते हैं।

इस पाप का घोर प्रायश्चित करना होगा, पीडितजनों से माफी मांगनी होगी और नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी अपराधी हैं, उन्हें अधिकतम दंड देना होगा। सिर्फ इंदौर के महापौर नहीं, मध्य प्रदेश का शासन एवं प्रशासन, इस महापाप के सभी जिम्मेदार लोग जनता के प्रति अपराध के कटघरे में खड़े हैं। यह मोहन यादव जी की परीक्षा की घड़ी है।
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