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मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना बनी वरदान: 2651 मासूमों को मिली नई जिंदगी; इस साल 583 सर्जरी सफल

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सांकेतिक तस्वीर



जागरण संवाददाता, पटना। मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना राज्य के हजारों जरूरतमंद परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं साबित हो रही है। जन्म से ही हृदय में छेद जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मासूमों को इस योजना के माध्यम से नया जीवन मिल रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, योजना की शुरुआत से अब तक 2651 बच्चों की सफल हृदय सर्जरी कराई जा चुकी है।

वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 583 बच्चों को नि:शुल्क इलाज के जरिए नई जिंदगी मिली है। यह योजना 5 जनवरी 2021 को शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य उन गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत देना है, जो निजी अस्पतालों में हृदय शल्यक्रिया पर आने वाले लाखों रुपये का खर्च वहन करने में असमर्थ होते हैं।

योजना का लाभ 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों को दिया जा रहा है। आइजीआइसी के निदेशक डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि हमारे यहां समय-समय पर कैंप लगाकर बच्चों के दिल के छेद बंद करने का सफल सर्जरी किए जाते है।
हर 1000 बच्चों में नौ को जन्मजात हृदय रोग

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म लेने वाले हर 1000 बच्चों में से नौ बच्चे जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित होते हैं। इनमें से करीब 25 प्रतिशत नवजातों को पहले वर्ष के भीतर सर्जरी की तत्काल जरूरत पड़ती है। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है।

चिकित्सकों का कहना है कि यदि बच्चा दूध पीते समय जल्दी थक जाए, रोते समय शरीर नीला पड़ने लगे या उसका वजन नहीं बढ़ रहा हो, तो यह हृदय में छेद होने का संकेत हो सकता है। ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें बाल हृदय योजना के तहत इलाज की सुविधा दी जाती है।
इस वर्ष अब तक 583 बच्चों की हुई सर्जरी

आंकड़ों पर ध्यान दें तो वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक हुए सर्जरी में श्री सत्य साईं हास्पिटल, अहमदाबाद 217 बच्चे (राज्य के बाहर), जयप्रभा मेदांता हास्पिटल, पटना 208 बच्चे, आइजीआइएमएस, पटना 80 बच्चे, आइजीआइसी 78 बच्चे को क्लोज सर्किट विधि से सफल सर्जरी किया गया।
क्या है मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना?

[*]योजना के तहत 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों को शामिल किया गया है।
[*]हृदय रोग से ग्रसित बच्चों की पहचान के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्क्रीनिंग कैंप लगाए जाते हैं।
[*]चयनित बच्चों के सभी प्रकार की सर्जरी और इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाती है।
[*]सर्जरी से पूर्व जांच और दवाओं की लागत भी सरकार वहन करती है।
[*]राज्य के बाहर (जैसे अहमदाबाद) इलाज के लिए हवाई या रेल यात्रा का खर्च भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिया जाता है।
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