AI शिक्षा में नई दौड़, बच्चों पर असर को लेकर बढ़ी चिंता; टेक कंपनियों का दावा, पढ़ाई आसान और व्यक्तिगत बनेगी
/file/upload/2026/01/3344375434945396964.jpgAI शिक्षा में नई दौड़, बच्चों पर असर को लेकर बढ़ी चिंता (सांकेतिक तस्वीर)
न्यूयॉर्क टाइम्स, न्यूयॉर्क। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) के शिक्षा क्षेत्र में बढ़ते इस्तेमाल को लेकर दुनिया भर में तेजी से पहल हो रही है, लेकिन इसके बच्चों पर पड़ने वाले संभावित नुकसान को लेकर भी चिंताएं गहराती जा रही हैं। अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों के नेतृत्व में कई देश स्कूलों और विश्वविद्यालयों में एआइ टूल्स को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
नवंबर की शुरुआत में माइक्रोसाफ्ट ने संयुक्त अरब अमीरात में दो लाख से अधिक छात्रों और शिक्षकों को एआइ टूल्स और प्रशिक्षण देने की घोषणा की। इसके कुछ ही दिनों बाद कजाकिस्तान में एक वित्तीय सेवा कंपनी ने ओपनएआइ के साथ समझौता कर 1.65 लाख शिक्षकों के लिए \“चैटजीपीटी एडु\“ उपलब्ध कराने का ऐलान किया।
वहीं, एलन मस्क की कंपनी एक्सएआइ अल सल्वाडोर में दस लाख से ज्यादा छात्रों के लिए एआइ ट्यूटरिंग सिस्टम विकसित कर रही है।टेक कंपनियों का तर्क है कि एआइ चैटबाट्स शिक्षकों का समय बचा सकते हैं, छात्रों की जरूरत के मुताबिक पढ़ाई को ढाल सकते हैं और उन्हें एआइ आधारित अर्थव्यवस्था के लिए तैयार कर सकते हैं। लेकिन बच्चों और स्वास्थ्य संगठनों का कहना है कि बिना सही दिशा-निर्देशों के एआइ का उपयोग बच्चों की सोचने-समझने की क्षमता को कमजोर कर सकता है।
माइक्रोसॉफ्ट और कार्नेगी मेलान यूनिवर्सिटी के हालिया अध्ययन में पाया गया है कि लोकप्रिय एआइ चैटबाट का ज्यादा इस्तेमाल लोगों की सोचने-समझने की क्षमता को कमजोर कर सकता है। एआइ बाट कभी-कभी भरोसेमंद लगने वाली गलत जानकारी भी दे देते हैं। वहीं, कई शिक्षक छात्रों द्वारा एआइ की मदद से की जा रही नकल की बढ़ती समस्या से जूझ रहे हैं।
वहीं यूनिसेफ जैसी संस्थाएं स्कूलों में एआइ पाठ्यक्रम शामिल करने को लेकर आगाह किया है। यूनिसेफ के डिजिटल नीति विशेषज्ञ स्टीवन वोस्लू का कहना है कि बिना सही मार्गदर्शन के एआइ सिस्टम का उपयोग छात्रों और शिक्षकों की कौशल क्षमता को धीरे-धीरे कम कर सकता है।कुछ देश संतुलित रास्ता अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।
एस्टोनिया ने \“एआइ लीप\“ नाम से राष्ट्रीय पहल शुरू की है, जिसमें छात्रों और शिक्षकों को एआइ के फायदे, सीमाएं और जोखिम सिखाए जा रहे हैं। आइसलैंड में भी शिक्षक एआइ टूल्स का प्रयोग कर रहे हैं, लेकिन छात्रों के लिए इन्हें अभी सीमित रखा गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एआइ शिक्षा को सहायक बना सकता है, लेकिन इसे बिना सोचे-समझे लागू करना भविष्य की पीढि़यों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
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