गवाही लेने के बाद पीड़िता को दोबारा अदालत में नहीं बुलाया जा सकता, हाईकोर्ट ने जिला अदालत का आदेश किया खारिज
/file/upload/2026/01/711213853848924658.jpgराज्य ब्यूरो, कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने पाक्सो मामले में जिला कोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए कहा है कि गवाही लेने के बाद पीड़िता को दोबारा अदालत में नहीं बुलाया जा सकता। कानून पीड़िता व्यक्ति को सम्मान और मानसिक सुरक्षा प्रदान करता है। वह उसके अधिकारों की भी रक्षा करता है।
कोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार राज्य के हुगली जिले में एक नाबालिग लड़की की गुमशुदगी के मामले की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि यौन शोषण के लिए उसे बेच दिया गया था।
मामले में गिरफ्तार आरोपित ने उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताडि़त भी किया था। मामले में अपहरण, मानव तस्करी, दुष्कर्म, साजिश और पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।
सुनवाई के दौरान जिला कोर्ट ने दो दिनों तक पीड़िता के बयान दर्ज किए। यहां तक कि आरोपित के वकील ने भी उससे पूछताछ की। लगभग पांच महीने बाद आरोपित के वकील ने अदालत में अपील दायर करते हुए कहा कि पहले उनके कनिष्ठ वकील ने पीड़िता से पूछताछ की थी, लेकिन वे कई महत्वपूर्ण सवाल पूछना भूल गए थे।
इसलिए पीड़िता को दोबारा बुलाकर पूछताछ की जानी चाहिए। आरोपित के वकील ने दंड संहिता की धारा 311 का हवाला दिया। इस धारा के अनुसार, गवाही पूरी होने के बाद भी गवाह को दोबारा बुलाया जा सकता है, उससे दोबारा पूछताछ की जा सकती है। हालांकि, ऐसा केवल तभी किया जा सकता है जब यह अत्यंत आवश्यक हो।
जिला अदालत ने आवेदन स्वीकार करते हुए दोबारा पूछताछ के लिए आदेश दिया। आदेश के खिलाफ पीडि़त परिवार ने हाई कोर्ट का रुख किया। कोर्ट की न्यायमूर्ति चैताली चटर्जी ने पाया कि जिला अदालत ने कोई तर्कसंगत कारण नहीं बताया था।
न्यायमूर्ति ने कहा कि पीडि़ता पहले ही अपना बयान दे चुकी थी। पांच महीने बाद उसे दोबारा अदालत में बुलाना उसे मानसिक पीड़ा देना और अपमान था। यह वास्तव में आरोपित की गलतियों को छिपाने का प्रयास था। हाई कोर्ट ने जिला अदालत के आदेश को खारिज कर दिया।
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