नारी सशक्तिकरण की मिसाल: सबौर की निर्मला देवी ने 3500 महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर, स्वरोजगार से बदली जिंदगियां
/file/upload/2026/01/8853526264414403588.jpgखुद के दुकान पर खड़ी निर्मला देवी। फोटो जागरण
ललन तिवारी, भागलपुर। जब नारी सशक्तिकरण केवल नारे तक सीमित नहीं रहता, तब उसकी सशक्त तस्वीर सबौर प्रखंड के रजंदीपुर गांव की निर्मला देवी में देखने को मिलती है। निर्मल स्वभाव, मजबूत इच्छाशक्ति और दूरदर्शी नेतृत्व के साथ, निर्मला देवी ने लगभग 3500 महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता की किरण जगाई है।
निर्मला का साहसिक कदम घर की चौखट से बाहर निकलना था, जिसे उनके परिवार और गांव ने कभी नहीं सोचा था। एक दशक के संघर्ष में, उन्होंने न केवल अपना रोजगार स्थापित किया, बल्कि महिलाओं के लिए एक आल इन वन साल्यूशन बनकर उभरीं। जीविका से जुड़ने के बाद, उन्होंने सबौर में संकुल स्तरीय जिज्ञासा जीविका संघ का गठन किया, जिससे उनकी प्रतिभा को पंख लगे।
सरकारी योजनाओं की जानकारी, प्रशिक्षण, बैंकिंग सपोर्ट और सतत मार्गदर्शन के माध्यम से, उन्होंने महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा। आटा चक्की, सब्जी बिक्री, नाश्ता दुकान और पशुपालन जैसे कार्यों से दर्जनों महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। नीरा योजना सहित कई सरकारी कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित कर, उन्होंने उन्हें आर्थिक मजबूती प्रदान की।
एक मास्टर ट्रेनर के रूप में, वह दुकानों पर जाकर महिलाओं की समस्याएं सुनती हैं और उन्हें समाधान बताती हैं। स्वयं भी दुकान चलाकर, वह यह संदेश देती हैं कि नेतृत्व उपदेश से नहीं, बल्कि उदाहरण से मजबूत होता है।
निर्मला देवी कहती हैं, \“जब महिलाओं के चेहरे पर आत्मविश्वास की मुस्कान देखती हूं, तो वही मेरी सबसे बड़ी कमाई है।\“ उनका लक्ष्य है कि हर महिला सशक्त बने, ताकि समाज उसे सक्षम समझे। निर्मला देवी की कहानी यह दर्शाती है कि जब संकल्प निर्मल हो और उद्देश्य जनहित का हो, तो नारी सशक्तिकरण एक आंदोलन बन जाता है।
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