मोटर वाहन अधिनियम में बड़ा संशोधन: किराए की स्कूल बसें भी नियमों के दायरे में, अब कहलाएंगी एजुकेशनल बस
/file/upload/2026/01/2245686629031285015.webpप्रतीकात्मक तस्वीर
जागरण संवाददाता, भागलपुर। केंद्र सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में व्यापक संशोधन की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक, 2025 का मसौदा तैयार कर इस पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सुझाव मांगे हैं।
इस संबंध में राज्यों के प्रधान सचिवों, परिवहन सचिवों और परिवहन आयुक्तों को पत्र भेजा गया है। राज्यों से प्राप्त सुझावों पर सात से आठ जनवरी को प्रस्तावित बैठक में विचार किया जाएगा।
प्रस्तावित संशोधन में शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े वाहनों के नियमों में अहम बदलाव किए गए हैं। अब तक कानून में एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन बस को \“ओम्नीबस\“ की श्रेणी में रखा गया था, जो केवल संस्थान की अपनी बसों तक सीमित था। नए संशोधन में \“ओम्नीबस\“ शब्द हटाकर स्पष्ट और व्यावहारिक परिभाषा दी गई है।
इसके तहत चालक को छोड़कर छह से अधिक यात्रियों को ले जाने वाले वे सभी वाहन, जिन्हें स्कूल या कॉलेज स्वामित्व, लीज या किराये पर लेकर छात्रों के परिवहन में उपयोग करता है, एजुकेशनल बस माने जाएंगे। इससे किराये पर संचालित स्कूल बसें भी नियमों के दायरे में आ जाएंगी। सरकार का कहना है कि इससे छात्रों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी।
वाहनों को वजन के आधार पर श्रेणियों में बांटने की तैयारी
संशोधन प्रस्ताव में वाहनों को वजन के आधार पर नई श्रेणियों में बांटने की भी तैयारी है। लाइट मोटर वाहन को अब दो वर्गों में विभाजित किया जाएगा। 3,500 किलोग्राम तक के वाहन श्रेणी-1 और 3,500 से 7,500 किलोग्राम तक के वाहन श्रेणी-2 में रखे जाएंगे। वहीं छह से अधिक यात्रियों को ले जाने और 12,000 किलोग्राम से अधिक वजन वाले वाहन हैवी पैसेंजर वाहन की श्रेणी में आएंगे।
इसके अलावा कान्ट्रैक्ट कैरिज की परिभाषा भी विस्तारित की जा रही है। 1988 के कानून में इसमें केवल मैक्सी कैब जैसी गाड़ियां शामिल थीं, जिन्हें पूरे वाहन के रूप में किराये पर चलाया जाता था। 2025 के संशोधन विधेयक में मोटरसाइकिल और मोटर कैब को भी कान्ट्रैक्ट कैरिज में शामिल करने का प्रस्ताव है। इसके तहत अलग-अलग यात्रियों से अलग किराया लेना भी वैध होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बाइक टैक्सी और कैब सेवाओं को कानूनी मान्यता मिलने का रास्ता साफ होगा।
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