उत्तराखंड बना हिमालयी क्षेत्र में सौर ऊर्जा का अगुवा, 837.89 मेगावाट क्षमता स्थापित
/file/upload/2026/01/5845971666911521373.jpgतस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। देश में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हो रहा है, लेकिन मैदानी राज्यों की तुलना में उत्तराखंड अभी काफी पीछे है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में कुल 837.89 मेगावाट सौर विद्युत क्षमता स्थापित की जा चुकी है।
यह कुल राष्ट्रीय क्षमता 1,32,848.26 मेगावाट सौर ऊर्जा का एक छोटा हिस्सा है। अगर, उत्तराखंड की तुलना राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे अग्रणी राज्यों से की जाए तो बड़ा अंतर दिखाई देता है। अलबत्ता, हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड सबसे आगे है।
राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, हरियाणा जैसे राज्यों से उत्तराखंड अभी काफी पीछे है, लेकिन तस्वीर तब बदल जाती है, जब उत्तराखंड की तुलना समकक्ष हिमालयी व केंद्र शासित प्रदेशों से की जाती है। उत्तराखंड हिमालयी क्षेत्र में सौर ऊर्जा उत्पादन में सबसे आगे है। उत्तराखंड की सौर ऊर्जा क्षमता 837.89 मेगावाट है।
इसके सापेक्ष हिमाचल प्रदेश की 310.29 मेगावाट, जम्मू-कश्मीर की 79.48 मेगावाट, अरुणाचल प्रदेश की 15.44 मेगावाट, लद्दाख की 11.40 मेगावाट और सिक्किम में 7.56 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता ही विकसित की जा सकी है।
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जानकारों के अनुसार पर्वतीय राज्यों में भौगोलिक परिस्थितियां, भूमि उपलब्धता और पर्यावरणीय प्रतिबंध बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए बड़ी चुनौती होते हैं। इसके बावजूद उत्तराखंड ने अन्य हिमालयी राज्यों की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन किया है। राज्य सरकार ने सोलर एनर्जी पालिसी के तहत वर्ष 2027 तक सौर क्षमता को 2500 मेगावाट तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, ताकि राज्य को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
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