वाराणसी में एक ही रात दो गांवों के मंदिरों में अराजक तत्वों ने मूर्तियाँ तोड़ीं, क्षेत्र में तनाव
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/06/article/image/murti-1767701561437.jpgपुलिस जांच कर रही है और सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
जागरण संवाददाता, (चौबेपुर) वाराणसी। क्षेत्र में एक ही रात के भीतर दो गांवों के मंदिरों में अज्ञात अराजक तत्वों द्वारा मूर्तियाँ तोड़े जाने की घटना ने क्षेत्र में आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम मुनारी (पटेल नगर) में स्थित मंदिर से हनुमान जी की मूर्ति को अराजक तत्वों ने बाहर निकालकर कई टुकड़ों में क्षतिग्रस्त कर दिया।
वहीं दूसरी घटना बगल के ग्राम लटौनी की है, जहाँ मंदिर में स्थापित शंकर जी एवं श्रीकृष्ण भगवान की मूर्तियों को भी तोड़ दिया गया। दोनों घटनाएँ एक ही रात को अंजाम दी गईं, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
घटना की सूचना मिलते ही दोनों गांवों के बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि इस कृत्य से उनकी धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुँची है। इस प्रकार की घटनाएँ समाज में अस्थिरता और तनाव का कारण बनती हैं, जो कि किसी भी समुदाय के लिए चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों ने इस घटना की निंदा की है और इसे धार्मिक सहिष्णुता के खिलाफ एक गंभीर हमला माना है।
मामले को लेकर दोनों गांवों के संबंधित प्रधानों ने थाना चौबेपुर में लिखित तहरीर देकर अज्ञात दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। प्रधानों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएँ समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करती हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि दोषियों को शीघ्र पकड़ा जाए ताकि क्षेत्र में शांति और सद्भावना बहाल हो सके।
स्थानीय प्रशासन ने भी इस घटना को गंभीरता से लिया है और मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि वे जल्द ही दोषियों को पकड़ने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे। इस घटना के बाद से क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस की गश्त भी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की और अप्रिय घटना से बचा जा सके।
इस घटना ने क्षेत्र के लोगों में एकजुटता की भावना को भी जन्म दिया है। ग्रामीणों ने इस प्रकार की घटनाओं के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होने का संकल्प लिया है। उनका मानना है कि समाज में एकता और भाईचारे की भावना को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार की घटनाएँ न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करती हैं, बल्कि समाज में विभाजन और असुरक्षा का कारण भी बनती हैं।
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