फरीदाबाद में चौंकाने वाला मामला: 20 साल तक कमर में गोली लेकर घूमती रही महिला, एक घाव से हुआ खुलासा
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/06/article/image/kamar-me-goli-1767702015699.jpgकमर के नीचले हिस्से से निकली गोली को दिखाती हुई कविता। सौ. स्वजन
जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। डबुआ काॅलोनी में रहने वाली महिला 20 साल तक अपने कमर के नीचले हिस्से में गोली लेकर घूमती रही। उसको किसी भी तरह के दर्द का अहसास नहीं हुआ। कुछ दिन पहले महिला के कमर के नीचले हिस्से में फोड़ा हुआ। घाव धीरे-धीरे पक गया। पास में रहने वाली बुजुर्ग महिला की सलाह पर फोड़े वाले हिस्से पर लेप किया गया। लेप के बाद फोड़े के अंदर नुकीली चीज दिखी, जिसको महिला ने खुद ही खींचकर निकाल दिया। जिसके बाद सब हैरान हो गए क्योंकि वह बंदूक की गोली थी।
12 साल की आयु में हुआ था कमर में दर्द
डबुआ काॅलोनी में रहने वाली कविता के चार बच्चे हैं। पति ड्राइवर का काम करता है। कविता के अनुसार, उसको कभी अहसास नहीं हुआ कि उसको कमर के नीचले हिस्से में गोली लगी है। मानेसर की रहने वाली कविता का कहना है कि 12 वर्ष की उम्र के दौरान स्कूल में पेपर देते समय उसको कमर के नीचले हिस्से में काफी दर्द का अहसास हुआ था। दर्द होने पर देखा कि कमर के नीचले हिस्से से खून निकल रहा है। उसको लगा कि किसी ने पत्थर मारा है।
स्कूल के पास में था आर्मी ट्रेनिंग कैंप
शिक्षक ने भी उसको घर जाकर आराम करने के लिए कहा। घर आकर डाॅक्टर को दिखाया और दवाई ले ली। धीरे-धीरे जख्म ठीक हो गया। कविता के अनुसार, उनके स्कूल के पास आर्मी का ट्रेनिंग कैंप था। शायद यह गोली वहीं से लगी थी। पिछले 20 साल से किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हुई।
डॉक्टर ने बताई सटीक वजह
पति प्रदीप के अनुसार, कविता को शादी के बाद भी किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। बादशाह खान सिविल अस्पताल के न्यूरो सर्जन डाॅ. उपेंद्र भारद्वाज ने बताया कि ऐसा होना संभव है, क्योंकि बुलेट एक मैटेलिक ऑब्जेक्ट है। जब गोली बंदूक से निकलती है, तो उसमें कोई जहर नहीं होता। वह केवल एक गरम लोहे का टुकड़ा होती है। कई बार गोली शरीर के हड्डी वाले हिस्से में रुक जाती है। ऐसा गोली की रफ्तार कम होने पर होता है।
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