शमशुल हुदा मामले में फंसे दो मदरसों की मान्यता निलंबित, ब्रिटिश नागरिकता, विदेशी फंडिंग और अवैध वेतन भुगतान बना आधार
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/09/article/image/up-madarsa--1767973331150.jpgसांकेतिक तस्वीर।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। एटीएस जांच के बाद मदरसा शिक्षक शमशुल हुदा खान की केंद्रीय भूमिका सामने आने पर दो मदरसों पर कार्रवाई की गई है। मदरसा शिक्षा परिषद ने संत कबीर नगर स्थित मदरसा कुल्लियातुल बनातिर रजविया (निस्वा) व आजमगढ़ के मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम, मुबारकपुर की मान्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई है। इन मदरसों पर आगे और कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी है।
एटीएस की रिपोर्ट के अनुसार मौलाना शमशुल हुदा खान वर्ष 2007 से ब्रिटेन में निवासरत थे और वर्ष 2013 में उन्होंने भारतीय नागरिकता त्यागकर ब्रिटिश नागरिकता ग्रहण कर ली थी। इसके बावजूद वे वर्ष 2017 तक आजमगढ़ के मदरसे में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत रहे और इस दौरान सरकारी वेतन लेते रहे, बाद में उन्हें पेंशन का भुगतान भी किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरे प्रकरण में मदरसा प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत रही।
जांच में खुलासा हुआ कि शमशुल हुदा खान ने मदरसा संचालन की आड़ में विदेश से धन एकत्र कर भारत भेजा, जिसके लिए कुल्लियातुल बनातिर रजविया एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी और रजा फाउंडेशन जैसे एनजीओ का उपयोग किया गया। विदेशी फंडिंग में कमीशनखोरी और संदिग्ध लेन-देन के भी प्रमाण मिले हैं।
संत कबीर नगर के मामले में मदरसा बोर्ड ने पाया कि मदरसा जिन गाटा संख्या 154, 158 और 245 की भूमि पर मान्यता लेकर संचालित था, वे जिलाधिकारी और न्यायालय के आदेश से राज्य सरकार में निहित हो चुकी हैं। इसके बावजूद मदरसा बिना अनुमति दूसरे भवन में संचालित किया जा रहा था, जो उप्र अशासकीय अरबी-फारसी मदरसा मान्यता नियमावली 2016 का सीधा उल्लंघन है।
मदरसा बोर्ड के निर्देश पर संत कबीर नगर में शमशुल हुदा खान के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराई जा चुकी है। साथ ही सोसायटी का पंजीकरण सहायक निबंधक द्वारा निरस्त किया गया है, हालांकि उस पर न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त है। आजमगढ़ मदरसे के मामले में भी प्रबंधन, प्रधानाचार्य और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक व दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। मदरसा शिक्षा परिषद ने स्पष्ट किया है कि राज्य की सुरक्षा, सरकारी धन और शैक्षणिक संस्थानों की पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा और जांच के दायरे में आने वाले अन्य मदरसों व व्यक्तियों पर भी कार्रवाई जारी रहेगी।
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