अब फोन से कर सकते हैं ठगी की शिकायत, बिना कोर्ट गए मिलेगा समाधान
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/10/article/image/Shopping-1768017564384.jpgशॉपिंग में ठगी की फोन पर शिकायत। फाइल फोटो
पवन कुमार मिश्रा, पटना। बीमा कराया, समय पर प्रीमियम भरा, लेकिन बीमारी के वक्त अस्पताल में कैशलेस सुविधा देने से या जीवनबीमा का भुगतान करने से इंकार कर दिया गया। बड़े अरमनों से कोई मनचाहा ऑनलाइन सामान मंगवाया, डिलीवरी तो समय पर हुई मगर डिब्बा खुलते ही घटिया या खराब उत्पाद निकला। शिकायत की तो न रिटर्न मिला न रिफंड। मोबाइल, इंटरनेट, ट्रैवल या होम सर्विस का वादा बड़े-बड़े दावों के साथ किया गया, लेकिन पैसे लेने के बाद कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए।
डिजिटल दौर में जितनी तेजी से सुविधाएं बढ़ी हैं, उससे कहीं ज्यादा गति से उपभोक्ताओं के साथ ठगी, धोखाधड़ी या सेवा में लापरवाही की शिकायतें बढ़ी हैं। ऐसे मामले उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं।
ज्यादातार ग्राहक अक्सर यह सोचकर चुप रह जाते हैं कि कहां शिकायत करें, कौन कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाएगा, सालों तक अधिवक्ताओं की फीस देगा। ई-कामर्स प्लेटफार्म, कंपनियां व कई बार बड़े दुकानदार तक ग्राहकों की इसी मजबूरी का फायदा उठाकर उनका अधिकार नहीं देतीं।
ऑनलाइन खरीदारी में खराब गुणवत्ता के सामान वापसी, रिफंड नहीं मिलने या सेवा देने में कोताही की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अधीन संचालित उपभोक्ता संरक्षण निदेशालय ने नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (एनसीएच) शुरू किया है।
अब ठगे गए ग्राहकों को बिना कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाए उनका पैसा वापस चंद घंटों या अधिकतम दो-तीन दिन में वापस मिल रहा है। यह सुविधा सिर्फ एक फोन कॉल , वाट्सएप या मैसेज पर मिल रही है। यह जानकारी पटना जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के सदस्य रजनीश कुमार ने दी।
तेजी से हो रहा समस्याओं का समाधान
रजनीश कुमार ने बताया कि जिन उपभोक्ताओं को हेल्पलाइन 1915 से समाधान नहीं मिला या वे उससे संतुष्ट नहीं थे, ऐसे 440 मामले 2025 में जिला आयोग के समक्ष आए थे। इसी समयाविध में आयोग ने 1033 मामलों का निष्पादन किया। इनमें नए के साथ लंबित मामले भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पहले जहां जीवनबीमा, हेल्थ इंश्योरेंस या इससे संबंधित मामले सर्वाधिक रहते थे
आजकल ई-कामर्स खासकर इलेक्ट्रानिक उत्पादों से संबंधित व 10 मिनट डिलिवरी वाले मामले ज्यादा आ रहे हैं। इसके अलावा रेलवे, फ्लाइट, अपार्टमेंट-फ्लैट, विभिन्न प्रवेश परीक्षा व नौकरियों की तैयारी कराने वाली कोचिंग, स्कूल-कॉलेजों की शिकायतें ज्यादा आ रही हैं।
अस्पताल की सेवा में कमी या चिकित्सा में उपेक्षा, ऑनलाइन शापिंग, इंश्योरेंस, भवन, स्कूल-कॉलेज, कोचिंग, रेलवे, फ्लाइट समेत सभी तरह की शिकायतों का समाधान किया जाता है। हेल्पलाइन त्वरित समाधान घर बैठे उपलब्ध करा रहा है।
सुबह 8:00 से शाम 8:00 बजे तक करें ऑनलाइन शिकायत :
उपभोक्ता सुबह 8:00 बजे से शाम आठ बजे तक टोल फ्री नंबर 1915 पर फोन कर, 8800001915 पर वाट्सएप या एसएमएस या उमंग एप से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। यहां से समाधान नहीं होने या संतुष्ट नहीं होने पर जिला या राज्य आयोग में शिकायत की जाती है।
शिकायत के लिए निम्न बातों का रखें ध्यान
[*]आर्डर आइडी, बिल, भुगतान प्रमाण, समस्या की फोटो-वीडियो व एप-कंपनी से की शिकायत की फोटो जरूर संलग्न करें।
[*]कंपनी-एप को चैट-ईमेल से लिखित शिकायत कर उसका टिकट नंबर जरूर लें।
[*]तीन से सात दिनों में समस्या का समाधान नहीं होने या जवाब नहीं मिलने पर राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन में फोन-वाट्सएप या ईमल करें।
[*]इसमे अपना नाम, मोबाइल नंबर, कंपनी का नाम, ऑर्डर विवरण, समस्या, प्रमाण व शिकायत अपलोड करें।
[*]हेल्पलाइन से सहायता नहीं मिलने पर उपभोक्ता आयोग में आफलाइन या ऑनलाइन मामला दर्ज कराएं।
[*]शिकायत की भाषा सरल व तथ्यात्मक रखें। इसमें तारीख, समय, राशि स्पष्ट लिखें।
किस आयोग में कितने तक की शिकायत
जिला आयोग में 50 लाख तक के मामले।
राज्य आयोग में 50 लाख से दो करोड़ रुपये तक के मामले।
राष्ट्रीय आयोग में दो करोड़ रुपये से अधिक के मामले।
क्या मांग सकते हैं :
[*]रिफंड
[*]मुआवजा
[*]सेवा में सुधार
[*]मानसिक उत्पीड़न का हर्जाना
ऐसे मामलों में मिला त्वरित न्याय
[*]बोरिंग रोड निवासी दिलीप कुमार को फ्लाइट टिकट रद करने के बाद रिफंड नहीं मिला, उन्होंने शिकायत की तो कंपनी ने तुरंत पूरी राशि वापस कराई।
[*]पाटलिपुत्र निवासी राजेश कुमार ने एक ई-कामर्स प्लेटफार्म से प्रीपेड किराना आर्डर किया। कंपनी ने डिलिवरी तो नहीं ही की, रिफंड के बारे में गलत सूचना दी। शिकायत पर पूरी राशि दो दिन में वापस कराई गई।
[*]पाटलिपुत्र निवासी कमलेश के पुत्र ने वाशिंग मशीन ऑनलाइन आर्डर कर भिजवाई। मशीन में खराबी के कारण वापस करने के आवेदन के बावजूद न तो मशीन उठवाई गई और न ही नई मशीन भेजी गई। उन्होंने आयोग की हेल्पलाइन में शिकायत की जिसके तीन दिन बाद उन्हें पूरी कीमत वापस कर दी गई।
[*]गोलारोड निवासी अखिलेश कुमार ने ई-कामर्स के प्लेटफार्म से पांच सितारा रेफ्रिजरेटर का आर्डर किया। जब उन्हें आर्डर मिला तो वह थ्री स्टार था। भारी छूट का लालच दे सस्ता व कम गुणवत्ता का उत्पाद भेजने की उन्होंने हेल्पलाइन में शिकायत की। इसके बाद कंपनी ने पूरी राशि वापस की।
इन मामलों में प्राप्त कर सकते हैं सहायता
[*]खाद्य सामग्री की खराब गुणवत्ता व मिलावट, एक्सपायर्ड, नकली या घटिया गुणवत्ता का सामान, गलत लेबलिंग (तारीख, वजन, सामग्री छिपाना) के मामले में।
[*]गलत वजन या माप यानी कम तौलना-नापना, पैकेट पर लिखे वजन से कम सामग्री देना।
[*]अधिक मूल्य वसूली, अधिकतम से अधिक मूल्य लेना, बिल न देना या गलत बिल देना, सरकारी दर से अधिक कीमत लेना आदि।
[*]सेवाओं में कमी जैसे मोबाइल, इंटरनेट, डीटीएच, बिजली, पानी की खराब सेवा, बैंक, बीमा, अस्पताल, स्कूल, ट्रैवल आदि में लापरवाही, मरम्मत या डिलीवरी में अनावश्यक देरी।
[*]भ्रामक विज्ञापन, झूठे दावे करने वाले विज्ञापन, आफर-छूट के नाम पर धोखाधड़ी, गारंटी-वारंटी का गलत प्रचार आदि।
[*]ऑनलाइन खरीदारी से जुड़े मामलों में गलत या खराब सामान की डिलीवरी, रिफंड-रिटर्न नहीं देना, ई-कामर्स प्लेटफार्म की शिकायत आदि।
[*]उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन जैसे शिकायत के बाद भी समाधान नहीं करना, जबरदस्ती कोई वस्तु-सेवा थोपना, अनुचित व्यापार व्यवहार करना।
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