ऋषिकेश में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर बनाने के लिए संचालित होंगी ई-बस, पर्यटन को लगेगा पंख
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/10/article/image/ebus_-1768018212920.jpgतस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। नगर एकीकृत विकास परियोजना के तहत यातायात और मोबिलिटी सुधारने के लिए ऋषिकेश में करीब 25 नई इलेक्ट्रिक बस चलाई जाएंगी। देहरादून में ई-बस और इंटीग्रेटेड यूनिट कंपनियों के लिए आयोजित हुए बिडर्स कान्क्लेव में इसकी जानकारी दी गई। परियोजना को उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास एजेंसी संचालित करेगी, इसे केएफडब्ल्यू जर्मन बैंक की ओर से वित्तपोषित किया जाएगा।
उत्तराखंड परिवहन निगम के तकनीकी उपमहाप्रबंधक भूपेश आनंद कुशवाह ने कहा कि निगम पहले ही ई बस परियोजना के लिए अनुमति दे चुका है। निगम ई-बस के संचालन और रखरखाव में सहयोग के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि संयुक्त रूप से कार्य करने पर यह परियोजना नगर के स्वच्छ और सुगम यातायात की रीढ़ बनेगी।
उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास एजेंसी के अपर कार्यक्रम निदेशक विनय मिश्रा ने कहा कि ऋषिकेश तीर्थनगरी, योग नगरी और गढ़वाल पहाड़ का प्रवेश द्वार है। यह नगर साहसिक पर्यटन और व्यापार का भी केंद्र है। नगर निगम बनने के साथ इसके भौगोलिक क्षेत्रफल में विस्तार हो रहा है।
निरंतर चल रही गतिविधियों जैसे चारधाम यात्रा, कुंभ, कांवड़ और पर्यटन के कारण यातायात को सुचारू रखना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मोबिलिटी परियोजना के तहत प्रारंभ में 25 ई-बस की तैनाती से नगर में प्रदूषण रहित, सुगम और सुरक्षित सार्वजनिक यातायात सुनिश्चित किया जा सकेगा।
पेयजल, सीवरेज, वर्षाजल-बाढ़ प्रबंधन पर भी होगा काम
ऋषिकेश में एकीकृत विकास परियोजना के अंतर्गत नगर निगम क्षेत्र के साथ-साथ पौड़ी जिले के स्वर्गाश्रम और टिहरी जिले के तपोवन एवं मुनि की रेती में पेयजल, सीवरेज, सड़कों, वर्षाजल-बाढ़ प्रबंधन व नगरीय यातायात प्रबंधन की कार्ययोजना बनाई जा रही है। उत्तराखंड शहरी क्षेत्र विकास एजेंसी की ओर से नियुक्त एजेंसी के परामर्शदाताओं ने प्रोजेक्ट के संबंध में विस्तृत प्रस्तुति दी और मोबिलिटी योजना के सभी पहलुओं की जानकारी दी।
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ऋषिकेश में चलने वाली ई-बस की खास बातें
[*]प्रत्येक बस सात मीटर लंबी और 22 सीटर क्षमता वाली होगी।
[*]योजना संकरी सड़कों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
[*]प्रथम चरण में 10-12 किलोमीटर के क्षेत्र में प्रारंभिक कारीडोर नेपाली फार्म, आईएसबीटी, रेलवे स्टेशन और त्रिवेणी घाट के बीच बस चलेगी।
[*]कुल 25 ई-बसों के साथ डिपो विकास, तकनीकी और सूचना प्रौद्योगिकी का इंटीग्रेशन किया जाएगा।
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