फर्जी पते-बोगस ITC... लखनऊ में करोड़ों की GST चोरी; क्राइम ब्रांच की जांच में चौंकाने वाले खुलासे
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/10/article/image/GST-tax-evasion-1768064932593.jpgआयुष्मान पांडेय, लखनऊ। संगीता मुदंरा और गीता ओरान ने साझेदारी में ‘गोरूपन इंटरप्राइजेज’ नाम से फर्म पंजीकृत कराई। दस्तावेजों में फर्म का पता खुनखुन जी रोड चौक लिखा था।
जांच टीम पते पर पहुंची तो वहां फर्म का अस्तित्व ही नहीं था। पंजीकरण के समय जो मोबाइल नंबर दिया गया था वह भी काम नहीं कर रहा था।
एक दो नहीं करीब सौ फर्में इसी तरह फर्जी दस्तावेजों और मोबाइल नंबरों के आधार पर पंजीकृत कर करोड़ों रुपये की कर चोरी की गई। फर्जीवाड़े के मुकदमों की जांच कर रही क्राइम ब्रांच को इस तरह की सौ फर्में मिली हैं जिनमें अधिकारियों की संलिप्तता भी सामने आ रही है।
क्राइम ब्रांच को गोमतीनगर सहित अन्य थानों में दर्ज साठ मुकदमों की जांच मिली थी। यह सभी मुकदमे राज्य कर आयुक्त की तरफ से दर्ज कराए गए थे। पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) अपराध कमलेश दीक्षित ने बताया कि जालसाजों को पकड़ने के लिए फर्म पर दर्ज मोबाइल नंबर को ट्रेस किया गया, तो बंद मिले।
उन पर दिए गए पते के बारे में जानकारी करने पर सभी दस्तावेज फर्जी मिले। जांच में कुल नौ सौ मोबाइल नंबर हैं, जो फर्जी आइडी के आधार पर लिए गए। ऐसे में सभी नंबरों का सीडीआर निकालकर डाटा जुटाया जा रहा है।
इसके साथ ही मोबाइल कंपनियों से भी संपर्क कर इस बात का पता लगाया जा रहा है कि एक साथ फर्जी दस्तावेजों पर नंबर किस आधार पर दिए गए। नंबर देने वालों ने दस्तावेजों की जांच तक नहीं की क्योंकि हर फर्म को 50 से ज्यादा सिम एलाट हैं तो किसी को सौ।
इसका पता लगाने के लिए संबंधित कंपनियों को पत्र लिखकर जानकारी मांगी गई है। जांच में सामने आया कि जालसाज विभिन्न लोगों को बिल बनाकर देते हैं, लेकिन जीएसटी का भुगतान नहीं करते। फर्म पकड़ी जाने पर दूसरी फर्म खोल ली जाती है।
कुछ मामले-
तालकटोरा में विजय इंटरप्राइजेज और अभिषेक ट्रेडर्स दोनों फर्मों के पते पर कोई भवन ही नहीं है। बिजली के बिल और अन्य दस्तावेज फर्जी निकले। विजय इंटरप्राइजेज का पंजीकरण केवल कर चोरी के उद्देश्य से कराया गया था।
वहीं, अभिषेक ट्रेडर्स ने 6.33 करोड़ रुपये का कारोबार दिखाकर 1.14 करोड़ रुपये की आइटीसी का गलत क्लेम किया। दोनों फर्मों के संचालकों के स्थायी पते महाराष्ट्र के बताए गए हैं। पुलिस और राज्य कर विभाग संयुक्त रूप से जांच कर रहे हैं।
फर्जी दस्तावेजों पर आनलाइन पंजीकरण कराकर एसएस ट्रेडर्स ने 4.24 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की। ऐशबाग स्थित पते पर जांच में फर्म से जुड़ा कोई साक्ष्य नहीं मिला। वहां ई-कामर्स कंपनी का कार्यालय संचालित पाया गया।
फर्म द्वारा बिना किसी वास्तविक आपूर्ति के केवल इनवाइस के आधार पर 61.77 करोड़ रुपये का कारोबार दर्शाया गया। इस मामले में बाजारखाला थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
गुडंबा में चार फर्मों गणेश इंटरप्राइजेज, प्रजापति इंटरप्राइजेज, श्रीकांत इंटरप्राइजेज और देविकारूपा इंटरप्राइजेज के जरिए 22.58 करोड़ रुपये की जीएसटी हेराफेरी सामने आई।
जांच में फर्मों का कोई अस्तित्व नहीं मिला। दस्तावेज फर्जी पाए गए और बोगस आइटीसी का बड़े पैमाने पर उपयोग कर सरकार को चूना लगाया गया। उपायुक्त राज्य कर की तहरीर पर गुडंबा थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
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