LHC0088 Publish time Yesterday 20:56

पति-पत्नी एक साथ भोजन करें या नहीं, पत्नी का क्या कर्तव्य है, पति का नाम लें या नहीं, बता रहीं सुश्री जय

https://www.jagranimages.com/images/2026/01/11/article/image/jaya-mishra-is-explaining-what-a-wifes-1768145220975.jpg

भागलपुर के कहलगांव में प्रवचन करतीं जय मिश्रा।



संवाद सूत्र, कहलगांव (भागलपुर)। पौराणिक परंपरानुसार पति का सीधे नाम लेना पाप है। सांकेतिक रूप में नाम लेनी चाहिए। पति को पहले भोजन कराकर ही पतिव्रता नारी को भोजन करनी चाहिए। पति के साथ एक पात्र में कभी भी भोजन नहीं करनी चाहिए। पति की आज्ञा से ही व्रत, अनुष्ठान तीर्थ करना श्रेष्ठ माना गया है। यह बातें कहलगांव नगर में उत्तरवाहिनी गंगा तट पर अवस्थित बाबा जागेश्वरनाथ महादेव मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय शिवमहापुराण कथा के छठे दिन कथा वाचन करते हुए कथा वाचिका जया मिश्रा ने कही है।


उन्होंने शिव–पार्वती विवाह की कथा, नारी धर्म कार्तिकेय जन्म प्रसंग पर विस्तार से प्रकाश डाले। उन्होंने कथा के दौरान शिव–पार्वती विवाह को धूमधाम से मनाए जाने का प्रसंग सुनाया। इस अवसर पर झांकी भी प्रस्तुत की गई। शिव बारात में सभी देवता तथा भूत–प्रेत बाराती के रूप में शामिल हुए थे। विवाह उपरांत माता पार्वती की विदाई के समय एक ब्राह्मणी द्वारा स्त्री धर्म की शिक्षा दी गई। इसमें पतिव्रता नारी के कर्तव्यों का को बताई थी।


कथावाचिका ने बताया कि 752 श्लोकों में केवल नारी धर्म की शिक्षा दी गई है। माता मैना द्वारा पार्वती की विदाई की गई और माता पार्वती भगवान भोलेनाथ के साथ कैलाश पर्वत पर विराजमान हुईं। आगे कथा में कार्तिकेय जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया गया कि जब माता पार्वती गर्भ धारण करना चाहती थीं, उसी समय देवताओं द्वारा भगवान शिव को पुकारे जाने के कारण वह संभव नहीं हो सका। इससे क्रोधित होकर माता पार्वती ने देवताओं को श्राप दिया कि उनकी पत्नियां भी संतानहीन रहेंगी।


भगवान शिव का तेज अग्नि ने धारण किया, परंतु वह भी उसे सहन न कर सकी। इसके बाद छह ऋषि पत्नियों ने उसे धारण किया। किंतु वे भी असमर्थ रहीं। अंततः शिव तेज को हिमालय की गंगा में प्रवाहित किया गया, वहां से शरकंडों में गिरने पर एक बालक का रूप प्रकट हुआ, जो आगे चलकर भगवान कार्तिकेय कहलाए। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा परिसर शिवमय वातावरण से गुंजायमान हो रहा था।
Pages: [1]
View full version: पति-पत्नी एक साथ भोजन करें या नहीं, पत्नी का क्या कर्तव्य है, पति का नाम लें या नहीं, बता रहीं सुश्री जय

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com