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राजस्थान की ऐतिहासिक व कलात्मक हवेलियों के संरक्षण की तैयारी, यूनेस्को सूची में शामिल कराने का प्रयास

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राजस्थान के शेखावाटी की ऐतिहासिक और कलात्मक हवेलियां। (फाइल)



नरेंद्र शर्मा, जयपुर। देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी राजस्थान के शेखावाटी की ऐतिहासिक और कलात्मक हवेलियों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार कानून बनाने की तैयारी कर रही है। इस माह के अंत से प्रारंभ हो रहे विधानसभा के बजट सत्र में कानून बनाने को लेकर विधेयक पारित करवाए जाने की तैयारी है। आवश्यकता होने पर भवन विनियम बदले जाएंगे।

पुरानी हवेलियों में होमस्टे अथवा संग्रहालय बनाए जा रहा है। तीन हवेलियों को बड़े औद्योगिक घरानों ने अपने विश्राम गृह के लिए संरक्षित किया है। करीब 125 साल पहले बनी नवलगढ़ की पोद्दार हवेली को संग्रहालय बनाया गया है। शेखावाटी क्षेत्र में शामिल सीकर, चूरू एवं झुंझुनूं जिलों की 100 से 200 वर्ष पुरानी 662 हवेलियों का सर्वेक्षण कर संरक्षित करने की योजना बनाई गई है।

प्रारंभिक चरण में अब तक 27 हवेलियों का जीर्णोद्धार किया गया है। इस कार्य के लिए उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी और अधिकारियों ने शेखावाटी के उन बड़े औद्योगिक घरानों से सहयोग मांगा है, जो मूल रूप से सीकर, चूरू और झुंझुनूं के निवासी हैं लेकिन कई वर्षों पहले असम, पश्चिम बंगाल, मुंबई, बिहार एवं दक्षिण भारत के राज्यों में जाकर बस गए हैं।

इनमें झुंझुनूं जिले में पिलानी के मूल निवासी बिड़ला परिवार, रामगढ़ के पोद्दार परिवार, मंडावा के गोयनका, आर्सेलर के प्रमुख सादुलपुर निवासी लक्ष्मी मित्तल एवं वेदांता समूह के प्रमुख अनिल अग्रवाल शामिल हैं। इन औद्योगिक घरानों ने अपने पुरखों की ऐतिहासिक हवेलियों के संरक्षण में सहयोग का भरोसा दिया है।

मंडावा के मूल निवासी व उद्यमी मनीष गोयनका ने कहा कि 200 साल पहले मंडावा में गोयनका परिवार ने हवेली बनाई थी, अब हमारी पांचवीं पीढ़ी खुद इस हवेली को संभाल रही है।
यूनेस्को की सूची में शामिल करवाने का भी प्रयास

राज्य सरकार हवेलियों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करवाने के प्रयास में भी जुटी है। स्थानीय निकायों, जिला प्रशासन एवं सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों की टीम उनके संरक्षण के लिए प्रयास कर रही है। सार्वजनिक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता ने सोमवार को हवेलियों के जीर्णोद्धार की समीक्षा को लेकर बैठक बुलाई है।

उप मुख्यमयंत्री, दीया कुमारी ने कहा कि ऐतिहासिक एवं कलात्मक हवेलियां हमारी सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है। इन्हें संरक्षित करना हमारी प्राथमिकता है। इन हवेलियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक प्रदेश में आते हैं।
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