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5 साल में किस-किस कंपनी ने पाकिस्तान छोड़ा, P&G पहला नाम नहीं


माइक्रोसॉफ्ट के बाद एक और दिग्गज कंपनी ने पाकिस्तान का साथ छोड़ दिया है। करीब 34 साल बाद प्रॉक्टर एंड गैम्बल (P&G) ने पाकिस्तान से बाहर जाने का फैसला किया है। कंपनी अपना रेजर डिवीजन जिलेट को भी बंद करने का ऐलान किया है। पी एंड जी से पहले भी कई कंपनियों ने पाकिस्तान छोड़ा है। मगर अब पाकिस्तानी जनता को साबुन और शैम्पू की चिंता सताने लगी है। पाकिस्तान में लगातार बंद होते उद्योग से उसकी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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पी एंड जी दुनियाभर में अपने 7,000 नौकरियों को खत्म कर रहा है। 1991 में पाकिस्तानी बाजार में दस्तक देने वाली पी एंड जी के बंद होने से लगभग 5,000 लोग बेरोजगार होंगे। कंपनी ऊर्जा की महंगी दर और कानूनी बाधाओं के अलावा कमजोर उपभोक्ता खर्च ने पी एंड जी को काफी नुकसान पहुंचाया। 2023 में जिलेट ने पाकिस्तान में तीन अरब रुपये का राजस्व जुटाया।





इस साल उसके राजस्व में आधे की गिरावट देखने को मिली। पिछले साल यानी 2024 में पी एंड जी ने अपना साबुन प्लांट निमिर इंडस्ट्रियल केमिकल लिमिटेड के हाथों बेच दिया था। तभी से संकेत मिलने लगे थे कि किसी भी वक्त पी एंड जी पाकिस्तान को अलविदा कह देगी। आइये जानते हैं कि पिछले 5 साल में कितनी कंपनियों ने पाकिस्तान छोड़ा है।



12 जुलाई 2022 को पाकिस्तान का स्टार्ट-अप एयरलिफ्ट ने अपना ऑपरेशन बंद किया है। यह प्लेटफॉर्म इंस्टेंट ग्रॉसरी डिलीवर करता था। पाकिस्तान के इतिहास की सबसे बड़ी 85 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई, लेकिन वह सर्वाइव नहीं कर सकी। 2019 में मिस्र की परिवहन कंपनी SWVL ने लाहौर से अपना कामकाज शुरू किया। कराची और इस्लामाबाद तक विस्तार करने वाली कंपनी को तेल की बढ़ती कीमतों के कारण पाकिस्तान छोड़कर जाना पड़ा।





डच कंपनी विटोल से जुड़ा एक स्टार्ट-अप वावाकार्स साल 2020 में पाकिस्तान आया है। उसे भी दो साल में अपना बोरिया-बिस्तर बांधना पड़ा। यह कंपनी कारों की खरीद-बिक्री करती थी। पाकिस्तान में कारफर्स्ट ने भी अपना ऑपरेशन बंद कर दिया। फूड डिलीवरी से जुड़ी पाकिस्तानी मूल की कंपनी करीम भी कुछ खास नहीं कर सकी। उसे भी अपनी दुकान समेटनी पड़ी।





पाकिस्तान में अधिकांश कंपनियां आर्थिक मंदी और राजनीतिक अस्थिरता से ऊब कर देश छोड़ रही हैं। सिर्फ पाकिस्तान के कपड़ा उद्योग में करीब 70 लाख लोगों की छंटनी की गई। आज हालत यह है कि पाकिस्तान की एक बड़ी आबादी को काम के सिलसिले में पाकिस्तान छोड़कर जाना पड़ रहा है। साल 202 में 7,65,000 लोगों ने पाकिस्तान छोड़ा था। 2021 में यह संख्या 2,25,000 और 2020 में 2,88,000 थी। अधिकांश पाकिस्तानी संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, चीन, इराक, जापान, ओमान और कतर जाते हैं।





दिग्गज कंपनी शेल ने 2022 में अपनी 77 फीसद हिस्सेदारी बेचकर पाकिस्तान से किनारा कर लिया। शेल तेल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी है। उसका बाहर जाना किसी झटके से कम नहीं है। एक दशक पहले वॉल्ट डिजनी ने अपना कारोबार समेट लिया। नवंबर 2022 में अमेरिका की दवा कंपनी एली लिली और जून 2023 में जर्मन दवा कंपनी बायर ने अपना बोरिया-बिस्तर समेट लिया।





माइक्रोसॉफ्ट ने करीब 25 वर्षों तक पाकिस्तान में काम किया। इसके बाद इसी साल उसने अपना कामकाज ठप करने का ऐलान किया। टोटल एनर्जीज ने 2024 में टोटल पार्को में अपनी 50% हिस्सेदारी गनवोर ग्रुप को बेच दी। 2024 में फाइजर ने अपना कराची प्लांट बेच दिया। अब वह पाकिस्तान में दवाओं का उत्पादन नहीं करती है। पिछले साल टेलीनॉर ने भी अपनी सहायक कंपनी पीटीसीएल को बेचकर पाकिस्तान छोड़ दिया। जिलेट पाकिस्तान के पूर्व सीईओ साद अमानुल्लाह खान का कहना है कि मुझे उम्मीद है कि हुक्मरानों को एहसास होगा कि सब कुछ ठीक नहीं है।



जिलेट का पाकिस्तान छोड़ना उतनी पड़ी घटना नहीं है, जितना की उसका पाकिस्तान में आना। 2019 में पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में 4 नाइयों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन पर गैर-इस्लामी तरीके से दाढ़ी बनाने का आरोप था। कई कट्टरपंथी संगठनों ने दाढ़ी मुंडवाने के खिलाफ फतवा जारी कर रखा। नाइयों को धमकी दी गई कि दाढ़ी काटी तो उनकी दुकानों को आग लगा दी जाएगी। इसके बाद निशाना बनाकर कई दुकानों पर हमला किया गया। पाकिस्तान के कई इलाकों में 'फैशनेबल' दाढ़ी पर प्रतिबंध है। ऐसे देश में जिलेट के सामने अपने रेजर को बेचने की सबसे बड़ी चुनौती थी।




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