सिर्फ सुनवाई नहीं, समाधान की जगह बनेगा महिला आयोग: पटना में नए कोर्ट रूम, कपल काउंसलिंग कक्ष और बच्चों के लिए पालना घर
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/12/article/image/mahila-aayog-1768186731892.jpgबिहार राज्य महिला आयोग
डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार राज्य महिला आयोग का कार्यालय अब केवल शिकायत दर्ज कराने और सुनवाई की जगह नहीं रहेगा, बल्कि संवेदनशील संवाद और समाधान का केंद्र बनेगा। पटना स्थित महिला आयोग कार्यालय के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू हो गया है, जिसके तहत आधारभूत संरचना को आधुनिक और मानवीय जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है।
आयोग परिसर में नए कोर्ट रूम का निर्माण किया जा रहा है, ताकि मामलों की सुनवाई बेहतर और सुव्यवस्थित माहौल में हो सके। इसके साथ ही पति-पत्नी से जुड़े विवादों के लिए अलग से स्पेशल रूम तैयार किया जा रहा है, जहां दंपती को बैठकर आपस में बात करने और मुद्दों को सुलझाने का अवसर मिलेगा। यह कक्ष पूरी तरह शांत और निजी माहौल में होगा, ताकि संवाद बिना दबाव के हो सके।
महिला आयोग की अध्यक्ष प्रो. अप्सरा के अनुसार, आयोग में आने वाले मामलों में बड़ी संख्या पति-पत्नी विवाद से जुड़ी होती है। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा गया है कि घर में जिन बातों का समाधान नहीं निकल पाता, वे आयोग के मंच पर संवाद के जरिए सुलझ सकते हैं। इसी सोच के तहत कपल को समय और स्पेस देने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि वे आयोग के कक्ष में बैठकर अपने मतभेद दूर कर सकें।
इसके अलावा, आयोग आने वाली कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों को साथ लेकर पहुंचती हैं। सुनवाई के दौरान बच्चे परिसर में इधर-उधर घूमते रहते हैं, जिससे न केवल परेशानी होती है बल्कि उनके स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति पर भी असर पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए आयोग परिसर में पालना घर का निर्माण कराया जा रहा है। यहां बच्चे सुरक्षित और आरामदायक माहौल में अपने माता-पिता का इंतजार कर सकेंगे, जिससे सुनवाई प्रक्रिया भी निर्बाध रूप से चल सकेगी।
आयोग को बगल की जमीन उपलब्ध होने से अब कार्यालय का भौतिक विस्तार भी किया जा रहा है। इसके तहत महिला आयोग के सातों सदस्यों के लिए अलग-अलग चेंबर बनाए जा रहे हैं, जो पहले व्यवस्थित रूप में उपलब्ध नहीं थे। साथ ही कोर्ट रूम का सौंदर्यीकरण भी किया जा रहा है।
प्रो. अप्सरा ने बताया कि रेनोवेशन पूरा होने के बाद महिला आयोग का कार्यालय पूरी तरह नए गेटअप में नजर आएगा। इसका उद्देश्य केवल भवन को सुंदर बनाना नहीं, बल्कि महिलाओं और उनके परिवारों को सम्मानजनक, सुरक्षित और संवेदनशील माहौल देना है, जहां वे खुलकर अपनी बात रख सकें और समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकें।
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