नोएडा जिला अस्पताल में अब गर्भस्थ शिशु की सेहत बताएगा कलर डॉपलर अल्ट्रासाउंड, CM योगी के निर्देश पर सुविधा स्वीकृत
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/12/article/image/color-doplor-1768202496663.jpgनोएडा के जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के लिए कलर डॉपलर अल्ट्रासाउंड सुविधा जल्द शुरू होगी।
जागरण संवाददाता, नोएडा। अब गर्भवती महिलाओं को अपने अजन्मे बच्चों की सेहत की जांच के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के लिए कलर डॉपलर अल्ट्रासाउंड की सुविधा शुरू होने वाली है। इस अत्याधुनिक मशीन से डॉक्टर भ्रूण की सेहत और हलचल पर नजर रख पाएंगे।
डॉक्टरों ने बताया कि डॉपलर अल्ट्रासाउंड से यह पता चलता है कि गर्भ में पल रहे बच्चे तक खून का बहाव, ऑक्सीजन और पोषक तत्व सही मात्रा में पहुंच रहे हैं या नहीं। यह टेस्ट खासकर हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में बहुत ज़रूरी है।
स्त्री रोग विशेषज्ञ और प्रसूति रोग विशेषज्ञ, और कार्यवाहक मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, डॉ. अजय राणा ने बताया कि भारत सरकार और राज्य सरकार की फायदेमंद योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान और जननी सुरक्षा योजना की वजह से संस्थागत डिलीवरी बढ़ी हैं।
जिला अस्पताल में रोजाना 15 से 20 डिलीवरी होती हैं, कभी-कभी यह संख्या 30-35 तक भी पहुंच जाती है। ओपीडी में गर्भवती महिलाओं की संख्या भी लगातार बढ़ रही है, साथ ही हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के मामले भी बढ़ रहे हैं। डॉपलर अल्ट्रासाउंड की कमी के कारण कभी-कभी गर्भवती महिलाओं की जांच में दिक्कत आती थी।
सरकार से कलर डॉपलर अल्ट्रासाउंड के लिए अनुरोध किया गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर, गौतम बुद्ध नगर के बेहतरीन रिकॉर्ड से प्रभावित होकर और बेहतर भ्रूण देखभाल की ज़रूरत को समझते हुए, वरिष्ठ अधिकारियों ने कलर डॉप्लर अल्ट्रासाउंड को मंजूरी दे दी है।
सरकार द्वारा मशीन उपलब्ध कराते ही टेस्ट शुरू हो जाएंगे। इस टेस्ट से यह पता चलता है कि प्लेसेंटा सही से काम कर रहा है या नहीं और बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व मिल रहे हैं या नहीं। समय पर जांच से गर्भवती महिलाओं में संभावित जटिलताओं का पता चलता है, जिससे मातृ और शिशु मृत्यु दर कम होती है। यह टेस्ट अक्सर प्रेग्नेंसी के आखिरी महीनों में जान बचाने वाला साबित होता है।
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