Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी, तिल दान और माघ स्नान का विशेष महत्व
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/12/article/image/Makar-Sankranti-1768207046024.jpgमकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी, तिल दान और माघ स्नान का विशेष महत्व
संवाद सूत्र, बगहा। इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी गुरुवार (Makar Sankranti Date 2026) को मनाई जाएगी। इसकी जानकारी सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सह आचार्य पंडित भरत उपाध्याय ने दी। उन्होंने ने बताया कि भविष्य पुराण के अनुसार जब सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रदोष अथवा अर्धरात्रि के समय प्रवेश करता है, तो स्नान-दान अगले दिन किए जाते हैं।
दीपिका ग्रंथ में भी आधी रात के पहले या बाद अयन होने पर निकटवर्ती दिन को पवित्र काल माना गया है। अनंतभट्ट के मत के अनुसार, यदि सूर्य की संक्रांति आधी रात से पहले हो तो पहले दिन के अंत की पांच घड़ी और आधी रात के बाद हो तो दूसरे दिन की प्रारंभिक पांच घड़ी पवित्र मानी जाती है।
अपरार्क में भी सूर्यास्त, प्रदोष या अर्धरात्रि में संक्रांति होने पर दोनों दिन पुण्यकाल बताए गए हैं। बौधायन धर्मसूत्र के अनुसार भी दोनों दिन पुण्यदायी माने गए हैं। इन सभी शास्त्रीय निर्णयों के आधार पर 15 जनवरी 2026 को प्रातः सूर्योदय के बाद मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा।
आचार्य ने बताया कि माघ मास में तिल दान का विशेष महत्व है। नारद पुराण के अनुसार माघ स्नान के दौरान अग्नि तापना त्याज्य माना गया है। प्रतिदिन तिल और शर्करा का दान करना चाहिए, जिसमें तीन भाग तिल और एक भाग शर्करा हो।
तिल से स्नान, तिल का उबटन, तिल से हवन, तिल का तर्पण, तिल का भोजन और तिल का दान करने से पापों का नाश होता है। स्नान के बाद शंख, चक्र और गदाधारी भगवान माधव का पूजन कर विधिपूर्वक हवन तथा एक समय भोजन का विधान बताया गया है।
मकर संक्रांति एवं माघ मास में अग्नि तापना वर्जित बताया गया है। इसके साथ ही मकर संक्रांति के दिन शरीर पर तेल का अभ्यंग अर्थात लेपन नहीं करना चाहिए। आचार्य के अनुसार इन नियमों का पालन करने से पर्व का पूर्ण पुण्य फल प्राप्त होता है।
Pages:
[1]