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मुजफ्फरपुर में पैक्स नहीं, बाजार बना किसानों की पहली पसंद, धान खरीद में पिछड़ा जिला

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यह तस्वीर जागरण आर्काइव से ली गई है।



जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में इस साल धान क्रय की रफ्तार धीमी रही है। प्राथमिक कृषि साख समिति (पैक्स) के बजाय किसानों ने खुले बाजार पर अधिक भरोसा जताया, जिसका असर सरकारी खरीद पर साफ दिख रहा है।

जिले के लिए इस वर्ष 1 लाख 55 हजार 47 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया गया है, जबकि अब तक मात्र 38 हजार 157 मीट्रिक टन धान की ही खरीद हो सकी है। जानकारी के अनुसार पिछले साल एक नवंबर से धान क्रय की प्रक्रिया शुरू हुई है, जो 28 फरवरी तक चलेगी।

जिले के 16 प्रखंडों में चयनित 297 पैक्स और आठ व्यापार मंडलों के माध्यम से अब तक 5,656 किसानों से धान की खरीद की गई है। सबसे अधिक धान खरीद कुढ़नी प्रखंड से हुई है, जहां 650 किसानों से 4,921.622 मीट्रिक टन धान की आपूर्ति की गई। इसके बाद पारू प्रखंड में 600 किसानों से 4,118.575 मीट्रिक टन और सरैया प्रखंड में 571 किसानों से 3,960.385 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई।

कांटी प्रखंड से 417 किसानों ने 3,226.328 मीट्रिक टन, मीनापुर से 378 किसानों ने 3,223.021 मीट्रिक टन तथा साहेबगंज से 378 किसानों ने 2,608.910 मीट्रिक टन धान की आपूर्ति की है।

वहीं औराई, बंदरा, मोतीपुर, मुरौल, कटरा, मडवन और मुसहरी प्रखंड अपेक्षाकृत पिछड़े हुए हैं। गायघाट प्रखंड में अब तक धान की खरीद शून्य बनी हुई है। किसान भूषण एसके द्विवेदी ने बताया कि उनके पास अभी करीब 450 क्विंटल धान मौजूद है।

शुरुआत में बाजार भाव 1,700 रुपये प्रति क्विंटल था, जो घटकर 1,300 रुपये तक आ गया, इसलिए उन्होंने धान नहीं बेचा। अब दोबारा बाजार भाव बढ़ रहा है, इसी कारण इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पैक्स में किसानों को अपना बोरा और वाहन से पहुंचाना पड़ता है, जबकि बाजार में व्यापारी खेत से ही नगद भुगतान कर धान उठा लेते हैं। छोटे किसान पहले ही अपना धान बेच चुके हैं।

सहकारिता पदाधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि अभी धान खरीद का समय शेष है और लक्ष्य पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। अब तक 4,689 किसानों को भुगतान किया जा चुका है।
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