अब रसोई और वाहनों में दौड़ेगी गाय के गोबर से बनी गैस, यूपी में 26 सीबीजी प्लांट हुए शुरू
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/12/article/image/cow_cng-1768225303787.jpgडिजिटल टीम, लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के \“आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश\“ विजन के तहत अब गोवंश केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि राज्य की मजबूत अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा का आधार बनने जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार गाय के गोबर से बड़े पैमाने पर कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) बनाकर कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) पर देश की निर्भरता को कम करने की एक महत्वाकांक्षी रणनीति पर काम कर रही है। वैज्ञानिक आकलन बताते हैं कि केवल एक लाख गायों के गोबर से मीथेन का दोहन कर पेट्रोलियम उत्पादों में सालाना लगभग 500 करोड़ रुपये की बचत की जा सकती है।
प्रदेश में सीबीजी प्लांट्स का बिछा जाल
उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (UPNEDA) के माध्यम से प्रदेश रिन्यूएबल एनर्जी में अग्रणी राज्य बनकर उभरा है:
[*]वर्तमान स्थिति: 2022 से अब तक प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे लखनऊ, गोरखपुर, मथुरा, मेरठ और बरेली सहित कई स्थानों पर 26 से अधिक सीबीजी प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं।
[*]भविष्य की योजना: प्रदेश के अन्य हिस्सों में 21 नए प्रोजेक्ट्स पर काम तेजी से चल रहा है, जो जल्द ही उत्पादन शुरू कर देंगे।
अपशिष्ट से धन: गोपालकों की बढ़ेगी आय
गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, एक देशी गाय प्रतिदिन औसतन 10 किलोग्राम गोबर देती है। इस गोबर से मीथेन युक्त गैस निकालकर उसे परिष्कृत (Refine) किया जाता है, जो वाहनों और रसोई गैस के रूप में उपयोग की जा सकती है।
[*]सीधा लाभ: इस मॉडल से ग्रामीण क्षेत्रों में गोपालकों को उनके गोवंश के गोबर का उचित मूल्य मिलेगा, जिससे पशुपालन एक मुनाफे का व्यवसाय बनेगा।
[*]सफल उदाहरण: बाराबंकी का निजी सहभागिता वाला प्लांट और मथुरा की श्री माताजी गौशाला इस \“वेस्ट टू वेल्थ\“ मॉडल की सफलता के जीते-जागते प्रमाण हैं।
ऊर्जा सुरक्षा और जैविक कृषि का चक्र
यह योजना केवल ईंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि एक पूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का निर्माण करती है:
[*]गोबर से ऊर्जा: बायोगैस का उत्पादन कर ईंधन की बचत।
[*]ऊर्जा से जैव-उर्वरक: गैस निकलने के बाद बचे अवशेष (Slurry) से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद का निर्माण।
[*]जैविक खाद से कृषि: रसायनों का प्रयोग कम कर कृषि उत्पादकता और मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाना।
गांवों से निकलेगी आत्मनिर्भरता की राह
योगी सरकार की इस पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और कार्बन उत्सर्जन कम होगा, बल्कि गांवों से शहरों की ओर होने वाले पलायन पर भी रोक लगेगी। गोबर से पेट्रोलियम उत्पादों की बचत का यह चक्र उत्तर प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।
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