14,599 करोड़ के घोटाले में जेपी इंफ्राटेक की मुश्किलें बढ़ीं, पूर्व एमडी मनोज गौड़ के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/12/article/image/Court--1768202392397-1768225323178-1768225330237.jpgजागरण संवाददाता, नई दिल्ली। पटियाला हाउस स्थित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में जेपी ग्रुप से फ्राॅड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (JIL) के पूर्व प्रबंध निदेशक मनोज गौड़ के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। ये आरोपपत्र प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंजू बजाज चांदना की अदालत में दाखिल किया गया।
ED ने मनोज गौर को 13 नवंबर को गिरफ्तार किया था। उस पर करीब 14,599 करोड़ रुपये के घोटाले के जरिए हजारों घर खरीदारों से धोखाधड़ी करने का आरोप है। फिलहाल मनोज गौड़ न्यायिक हिरासत में हैं। इस बीच, सत्र अदालत ने उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए 17 जनवरी की तारीख तय की है।
ईडी का आरोप है कि जेपी ग्रुप की कंपनियों ने आवासीय परियोजनाओं के निर्माण और उन्हें पूरा करने के नाम पर घर खरीदारों से बड़ी रकम जुटाई, लेकिन इस धन का इस्तेमाल निर्माण कार्य के बजाय अन्य उद्देश्यों में किया गया। इसके चलते हजारों खरीदारों के फ्लैट अधूरे रह गए और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।
एजेंसी के मुताबिक, जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) और जयप्रकाश इंफ्राटेक लिमिटेड (जेआईएल) ने नोएडा की जेपी विशटाउन और ग्रेटर नोएडा की जेपी ग्रीन्स परियोजनाओं के लिए 33 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्र की थी। आरोप है कि इस रकम का बड़े पैमाने पर डायवर्जन किया गया, जिससे परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं।
ईडी ने यह जांच दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज की गई कई एफआइआर के आधार पर शुरू की थी। ये एफआईआर जेपी विशटाउन और जेपी ग्रीन्स के फ्लैट खरीददारों की शिकायतों पर दर्ज की गई थीं, जिनमें कंपनी और उसके प्रमोटरों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के आरोप लगाए गए थे।
यह भी पढ़ें- भगवान न करे अगर हममें से किसी को एक रात रुकना पड़े..., कड़ाके की ठंड में रैन बसेरों की कमी पर दिल्ली HC सख्त
Pages:
[1]