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तुर्कमान गेट पर हुए बवाल के बाद खुली नगर निगम की पोल, इन 16 मार्गों पर दशकों से फैले अतिक्रमण से कराह रहे लोग

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तुर्कमान गेट इलाके में हटाया गया था अतिक्रमण। जागरण



मोहम्मद साकिब, नई दिल्ली। दिल्ली में हाल ही में तुर्कमान गेट इलाके में दरगाह फैज-ए-इलाही के आसपास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुए बवाल ने एक बार फिर पुरानी दिल्ली और मध्य दिल्ली में फैले अतिक्रमण के गंभीर मुद्दे को उजागर कर दिया है।

तुर्कमान गेट की घटना को लेकर जहां नगर निगम की कार्रवाई का विरोध हुआ, वहीं यह साफ हो गया कि अतिक्रमण की समस्या सिर्फ इसी इलाके तक सीमित नहीं है। पुरानी दिल्ली सहित आसपास के इलाके में 16 ऐसे प्रमुख मार्ग हैं, जहां दशकों से अतिक्रमण के चलते आम जनता को रोज भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इन मार्गों में चेम्सफर्ड रोड, सदर थाना रोड, देश राज भाटिया रोड, राम कुमार मार्ग, ईदगाह रोड, जीबी रोड, श्रद्धानंद मार्ग, कुतुब रोड, आजाद मार्केट रोड, बहादुरगढ़ रोड, पहाड़ी धरीज रोड, न्यू रोहतक रोड, पुराना कुतुब रोड, विश्वकर्मा मार्ग और राजमस स्कूल रोड शामिल हैं। इन सड़कों पर अतिक्रमण का हाल इतना बदतर है कि वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल चलने वालों के लिए भी सड़क से गुजरना मुश्किल हो गया है।

पुलिस और प्रशासन की शह पर ही सड़क के दोनों ओर रेहड़ी-पटरी वालों, दुकानदारों, अवैध पार्किंग और अस्थायी ढांचों ने स्थायी रूप से डेरा जमा रखा है। नतीजा यह है कि सड़कों की चौड़ाई सिकुड़कर आधी से भी कम रह गई है। जहां सामान्य दिनों में कुछ ही मिनटों में तय होने वाला सफर होता था, वहीं अब लोगों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता है।

इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित स्कूली बच्चे, कार्यालय जाने वाले कर्मचारी, बुजुर्ग और मरीज हो रहे हैं क्योंकि कई बार तो मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस ही इस जाम में फंस जाती है।

लोगों का आरोप है कि अतिक्रमण कारियों को न तो पुलिस का डर है और न ही नगर निगम का। उनका कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत के कारण ही अतिक्रमण फल-फूल रहा है।

नगर निगम द्वारा समय-समय पर की जाने वाली कार्रवाई केवल खानापूर्ति बनकर रह गई है। दो-तीन दिन के लिए अतिक्रमण हटता जरूर है, लेकिन उसके बाद हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं।
खानापूर्ति साबित हाेती है नगर निगम व पुलिस की कार्रवाई

ऐसा नहीं है कि इन 16 मार्गों पर हुए अतिक्रमण की नगर निगम व पुलिस को जानकारी नहीं है। बल्कि उनकी शह पर ही दशकों से इन रहड़ी पटरी वाले सड़क पर कब्जा कर अपनी दुकान चला रहे हैं। महीनों सालों में खानापूर्ती के लिए इन पर कार्रवाई की जाती है, जिसका असर चंद दिनों तक दिखता है और फिर उसके बाद मामला शांत होते ही उसी ढर्रे पर सड़कें घेर ली जाती हैं। स्थानीय लाेगों का आरोप है कि अगर पुलिस प्रशासन की सख्ती हो तो इस समस्या से निजात मिल सकती है।
बारा टूटी चौक से ईदगाह रोड

लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबे हिस्से में अतिक्रमण की भरमार है। यहां दिनभर सड़कों पर लगने वाला गोवंशियों का जमावड़ा लगा दिखा। वहीं सड़क पर अवैध पार्किंग और रेहड़ी पटरी वालों ने कब्जा कर रखा है। यहां अवैध रूप से पटरियों पर सिलाई मशीन वाले बैठे हैं, जिसके कारण सड़क तंग होने से दिनभर वाहन चालक जाम से जूझते दिखे।
डीबी गुप्ता रोड से ईदगाह रोड

करीब सवा दो किमी का हिस्सा सड़क पर किए गए अतिक्रमण की चपेट में है। इस सड़क पर चटाई बनाने वालों और सबसे अधिक बल्डिंग सामग्री बचने वालों का कब्जा रहता है। यहां अवैध रूप से सड़कों पर सीमेंट, बदरपुर, रोड़ी और ईंटों का ढेर लगा रहता है। पुलिस प्रशासन सब कुछ देखने के बाद भी मूक दर्शक बने रहते हैं। वहीं दो पहिया वाहन रिपेयर करने वाले मैकेनिकों ने भी सड़क पर ही अपनी दुकान सजा रखी है, जिससे सड़क तंग हो गई है और जाम लगता है।
रानी झांसी रोड से देश राज भाटिया मार्ग

करीब सवा किमी के इस हिस्से में टूटी हुई सड़कें और अवैध पार्किंग जाम लगने की सबसे प्रमुख समस्या है। यहां नगर निगम की पार्किंग तो है लेकिन इस पार्किंग में अधिक पैसा कमाने के चक्कर में क्षमता से अधिक वाहन खड़े किए जाते हैं। इस कारण यहां दिनभर जाम लगा रहता है।
कुतुब रोड से रानी झांसी रोड

करीब ढाई किमी के इस हिस्से में समस्याओं को अंबार है। यहां अतिक्रमणकारियों ने फुटपाथ पर भी कब्जा किया हुआ है। सड़क के दोनों ओर अवैध पार्किंग ने समस्या को और भी जटिल बना दिया है। दुकानदारों ने अपनी दुकानें सड़क तक बढ़ाई हुई हैं। इसके अलावा लोडिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले भारी वाहनों को बीच में खड़ा किया जाता है, जिससे दिनभर जाम लगा रहता है।
अजमेरी गेट से मोहल्ला निहारियान

करीब 500 मीटर के इस हिस्से में अवैध पार्किंग का कब्जा रहता है। सड़क के दोनों तरफ दो लाइन में वाहन खड़े किए जाते हैं, जिससे सड़क तंग हो गई है। वहीं इस सड़क पर रिक्शा माफिया का कब्जा है। यहां दुकानदारों ने सड़क को घेरा हुआ है, जगह न मिलने से वाहनों की लंबी कतारें दिनभर लगी रहती हैं।
मोहल्ला निहारियान से लाहौर गेट चौक

करीब ढाई किलोमीटर के इस हिस्से में नगर निगम की पार्किंग यातायात जाम का मुख्या कारण है। यहां स्थित अनाज मंडी में ट्रक और टेंपो में सामान लोड कर लाया जाता है, जो दिनभर सड़क पर खड़े रहते हैं। दुकानदारों का सड़क पर कब्जा रहता है और नगर निगम की लापरवाही के चलते दिनभर लोग जाम के झाम से जूझते रहते हैं।
रानी झांसी रोड से पुल मिठाई

करीब दो किमी के इस हिस्से में मेट्रो के निर्माण के चलते जाम की समस्या उत्पन्न रहती है। पुल मिठाई पर पटरियों पर मसाले और ड्राई फ्रूट की दुकानें सजी रहती हैं। पटरियों पर कब्जे से चलते ख्ररीदारी करने आने वाले अपने वाहन सड़क पर लगाकर खरीदारी में जुट जाते हैं, जिससे दिनभर यहां यातायात जाम रहता है और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सदर बाजार से सदर बाजार रेलवे स्टेशन

करीब 300 के हिस्से में डिवाइडर पर ही अवैध पटरियों को बाजार लगा हुआ है। दुकानदारों ने फुटपाथ को घेरा हुआ है और सड़क पर ही ई-रिक्शा चालकों ने स्टैंड बनाया हुआ है। दिनभर ई-रिक्शा खड़े होने से पैदल चलने वाले यात्रियों का निकलना भी दूभर हो जाता है। सदर बाजार खरीदारी के लिए आने वाले लोगों को परेशानी होती है।
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