Chikheang Publish time 1 hour(s) ago

ये आलू नहीं, कमाई की ‘मशीन’ है! 75% अनुदान पर किसानों को मिल रहा चिप्स वाला बीज...कैसे करें आवेदन

https://www.jagranimages.com/images/2026/01/13/article/image/potato-1768275074953.jpg

आलू की खेती से किसानों की आमदनी में बड़ा उछाल



डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार में खेती अब केवल पेट पालने का साधन नहीं, बल्कि मुनाफे का मजबूत मॉडल बनती जा रही है। राज्य सरकार की नई पहल ने आलू की खेती को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। चिप्स और फ्रेंच फ्राइज बनाने में इस्तेमाल होने वाले हाई-डिमांड लेडी रोसेटा (Lady Rosetta) आलू को बढ़ावा देकर सरकार किसानों को सीधे फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री से जोड़ने की तैयारी में है। इस योजना के तहत किसानों को इस विशेष किस्म के आलू का बीज 75 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

कृषि विभाग का मानना है कि लेडी रोसेटा आलू की खेती से किसानों की आमदनी में बड़ा उछाल आएगा। यही वजह है कि लेडी रोसेटा क्षेत्र विस्तार योजना को तेजी से जमीन पर उतारा जा रहा है। इस योजना के तहत किसान न्यूनतम 0.25 एकड़ से लेकर अधिकतम 5 एकड़ तक इस आलू की खेती कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 15 जनवरी तय की गई है और चयन \“पहले आओ, पहले पाओ\“ के आधार पर होगा।
क्यों खास है लेडी रोसेटा आलू

लेडी रोसेटा आलू सामान्य आलू से बिल्कुल अलग है। इसमें नमी की मात्रा कम होती है और ड्राई मैटर अधिक होता है, जिससे यह चिप्स, फ्रेंच फ्राइज और कुरकुरे जैसे प्रोसेस्ड फूड के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।

यह आलू तलने पर कम तेल सोखता है और रंग भी बेहतर रहता है। यही कारण है कि देश-विदेश की बड़ी फूड प्रोसेसिंग कंपनियों में इसकी मांग लगातार बनी रहती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस किस्म का बाजार भाव सामान्य आलू की तुलना में अधिक होता है। किसानों को इसकी बिक्री में दिक्कत नहीं आती, क्योंकि मांग पहले से मौजूद है। सरकार भी यह सुनिश्चित कर रही है कि किसानों को मार्केटिंग में किसी तरह की परेशानी न हो।
लागत कम, फायदा ज्यादा

लेडी रोसेटा आलू की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर अनुमानित लागत करीब 1.25 लाख रुपये है। इसमें सरकार 75 प्रतिशत अनुदान, यानी लगभग 94 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दे रही है।

इस राशि में बीज की कीमत भी शामिल है। बीज की मात्रा प्रति हेक्टेयर लगभग 30 क्विंटल निर्धारित की गई है।

अनुदान की राशि दो किस्तों में दी जाएगी। पहली किस्त के रूप में 70,397 रुपये इनपुट और उपादान की खरीद के लिए दिए जाएंगे।

दूसरी किस्त 23,466 रुपये प्रति हेक्टेयर आलू रोपाई के बाद स्थल निरीक्षण और भौतिक सत्यापन के उपरांत मिलेगी। इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया गया है कि योजना का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचे।
100–110 दिनों में तैयार फसल

लेडी रोसेटा आलू की एक और खासियत यह है कि इसकी फसल करीब 100 से 110 दिनों में तैयार हो जाती है। यानी कम समय में बेहतर रिटर्न मिलने की पूरी संभावना रहती है। यही वजह है कि इसे \“कम समय, ज्यादा मुनाफा\“ वाली फसल माना जा रहा है।
किन जिलों को मिलेगा लाभ

इस योजना के तहत लेडी रोसेटा आलू का क्षेत्र विस्तार बिहार के 17 जिलों में किया जाएगा

। इनमें औरंगाबाद, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, गया, गोपालगंज, कटिहार, खगड़िया, लखीसराय, नालंदा, नवादा, पटना, समस्तीपुर, सारण, शेखपुरा, सिवान और वैशाली शामिल हैं। इन जिलों के किसानों में इस योजना को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है।
खेती से उद्योग की ओर बिहार

कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह योजना केवल किसानों की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य बिहार में आलू आधारित फूड प्रोसेसिंग उद्योग को बढ़ावा देना भी है।

राज्य में अगर चिप्स और फ्रेंच फ्राइज के लिए कच्चा माल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगा, तो उद्योगों की स्थापना को भी गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
कैसे करें आवेदन

इच्छुक किसान विभागीय वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in या बिहार कृषि ऐप के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे समय रहते आवेदन करें और इस लाभकारी योजना का हिस्सा बनें।

कुल मिलाकर, लेडी रोसेटा आलू की खेती बिहार के किसानों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरी है। सही तकनीक, सरकारी समर्थन और बाजार की मजबूत मांग के साथ यह आलू वाकई किसानों के लिए \“कमाई की मशीन\“ साबित हो सकता है।
Pages: [1]
View full version: ये आलू नहीं, कमाई की ‘मशीन’ है! 75% अनुदान पर किसानों को मिल रहा चिप्स वाला बीज...कैसे करें आवेदन

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com