बिहार कैबिनेट की पहली बैठक में 43 प्रस्तावों को मंजूरी, रोजगार-निवेश पर नीतीश सरकार का बड़ा फोकस, मुंबई में बिहार भवन
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/13/article/image/nitish-1-1768287730890.jpgबिहार कैबिनेट की पहली बैठक में 43 प्रस्तावों को मंजूरी
राज्य ब्यूरो, पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को बिहार मंत्रिपरिषद की अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें कुल 43 एजेंडों पर मुहर लगाई गई। वर्ष 2026 में मुख्य सचिवालय स्थित कैबिनेट हॉल में हुई यह नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक थी, जिसे कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा सहित सभी कैबिनेट मंत्री मौजूद रहे।
सूत्रों के अनुसार, यह बैठक खास तौर पर इसलिए अहम रही क्योंकि इसमें विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान एनडीए द्वारा राज्य की जनता से किए गए वादों को जमीन पर उतारने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि नए साल में विकास, रोजगार और निवेश उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
कैबिनेट बैठक में बिहार में नौकरी और रोजगार सृजन को लेकर विशेष कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति बनी। विभिन्न सरकारी विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया को तेज करने का निर्णय लिया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में बड़े पैमाने पर बहाली से जुड़े प्रस्ताव सामने आ सकते हैं, जिससे युवाओं को सीधा लाभ मिलेगा।
इसके साथ ही निजी क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। राज्य सरकार का मानना है कि उद्योगों और निजी कंपनियों को प्रोत्साहन देकर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए औद्योगिक विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप और कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं को गति देने के लिए अहम फैसले लिए गए हैं।
कैबिनेट ने कई विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रशासनिक सुधार और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है। सरकार का लक्ष्य है कि विकास कार्यों में तेजी लाकर बिहार को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाया जाए।
बैठक के बाद यह साफ संकेत मिला है कि नीतीश सरकार नए साल में आक्रामक विकास एजेंडे के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है। रोजगार, निवेश और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में लिए गए ये फैसले आने वाले समय में राज्य की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित कर सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन निर्णयों का असर न सिर्फ प्रशासनिक स्तर पर बल्कि आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी दिखेगा।
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