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Kasganj Honour Killing: 2.5 साल का प्रेम, एक साल की यातना और फिर ऑनर किलिंग, गांव लौटने से प्रेमी का इनकार

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चिता से शव निकालती पुलिस। फाइल



जागरण संवाददाता, कासगंज। ढोलना क्षेत्र के गांव नगला ढाकी में रविवार को हुई आनर किलिंग की घटना के बाद प्रेमी सचिन की जान भी खतरे में है। प्रेमिका नेहा की स्वजन द्वारा की गई हत्या के बाद सचिन दहशत के साए में है। उसे भी बंधक बनाकर मारने का प्रयास किया गया था, लेकिन किसी तरह वह बच गया। फिलहाल सचिन पुलिस अभिरक्षा में है, मगर उसका कहना है कि सुरक्षा हटते ही उसकी भी हत्या कर दी जाएगी। इसलिए वह अब गांव वापस नहीं जाएगा।
प्रेमी दहशत में, पुलिस सुरक्षा में बोला, अब कभी गांव नहीं लौटूंगा

कोतवाली ढोलना पुलिस की सुरक्षा में होने के बावजूद सचिन के चेहरे पर खौफ साफ नजर आ रहा है। वह जब भी घटना को याद करता है, उसकी आंखें भर आती हैं और रोंगटे खड़े हो जाते हैं। सचिन ने बताया कि उसका और नेहा का प्रेम संबंध ढाई साल पुराना था। गांव ही नहीं, दोनों परिवार भी इस रिश्ते से पूरी तरह वाकिफ थे। नेहा से उसका गांव में ही मिलना-जुलना रहता था। दोनों कभी गांव छोड़कर बाहर नहीं गए और न ही कभी किसी पंचायत की नौबत आई।
जिद पर अड़ी थी नेहा

सचिन के अनुसार नेहा की मां मीरा ने एक-दो बार उसे घर बुलाकर समझाया था कि दोनों अलग हो जाएं, लेकिन नेहा अपनी जिद पर अड़ी रही। इसके बाद नेहा पर स्वजन का दबाव बढ़ता गया। पिछले एक साल से उसके साथ मारपीट और प्रताड़ना आम बात हो गई थी। नेहा कई बार सचिन से गांव छोड़कर कहीं दूर चलने की गुहार लगाती रही, लेकिन सचिन ने हर बार हालात संभलने की उम्मीद में मना कर दिया।
दोनों घर छोड़कर निकल गए थे


हालात तब बेकाबू हो गए जब नौ जनवरी को दोनों घर छोड़कर निकल गए। आगरा में उन्हें पकड़ लिया गया और वापस गांव लाया गया। इसके बाद स्वजन ने नेहा की बेरहमी से हत्या कर दी। सचिन को भी पीटा गया और उसकी हत्या का प्रयास किया गया, लेकिन वह किसी तरह बच निकला।
इन दिनों सचिन पुलिस अभिरक्षा में है। उसका साफ कहना है कि पुलिस सुरक्षा हटते ही नेहा के स्वजन उसे मार देंगे। इसलिए वह अब नगला ढाकी नहीं लौटेगा। वह कहीं दूर जाकर रोजी-रोटी कमाएगा और नेहा की यादों के सहारे अपना जीवन बिताएगा।
पीयूष के पकड़ में आते ही खुल गया आगरा में होने का राज

प्रेमी सचिन और प्रेमिका नेहा नौ जनवरी की रात करीब आठ बजे गांव से लोगों की नजर बचाकर चुपचाप निकल गए। दोनों ने ढोलना से एटा तक के लिए आटो किया। एटा पहुंचने पर उनकी मुलाकात सचिन के बड़े भाई मलिखान के साले पीयूष से हुई, जो एटा के चौथा मील क्षेत्र स्थित गांव महाराजपुर का निवासी है।
पैसे हो गए थे खत्म

इसके बाद तीनों एटा से बस में सवार होकर आगरा पहुंचे। आगरा में ही उनके पास मौजूद पैसे लगभग खत्म हो गए। रुपये न होने के चलते वे आगरा से आगे कहीं और नहीं जा सके। इस पर पीयूष ने अपने घर से पैसे लाने की बात कही और रात में ही सचिन और नेहा को आगरा में छोड़कर अपने गांव लौट आया।

इधर नेहा के स्वजन लगातार दोनों की तलाश में जुटे थे। उन्हें यह जानकारी थी कि सचिन और पीयूष के बीच गहरी दोस्ती है और सचिन उससे हर बात साझा करता था। इसी आधार पर नेहा के स्वजन को पीयूष पर शक हुआ। वे सीधे उसके गांव पहुंचे और उसे पकड़ लिया।
नेहा के स्वजन ने पीयूष से भी मारपीट की

आरोप है कि नेहा के स्वजन ने पीयूष के साथ मारपीट की। दबाव में आकर पीयूष ने सचिन और नेहा के आगरा में होने की जानकारी दे दी। उसने बताया कि दोनों आगरा के सिकंदरा मार्ग स्थित गुरुद्वारे के पास ताल के समीप ठहरे हुए हैं। पीयूष से मिली सूचना के आधार पर नेहा के स्वजन 10 जनवरी को आगरा पहुंचे और वहां से दोनों को पकड़कर गांव नगला ढाकी ले आए। इसके बाद गांव में ही नेहा की उसके स्वजन द्वारा हत्या कर दी गई।

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