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हरियाणा में खेल मैदानों में भारी कमी, भिवानी में 742 में से 715 स्कूलों में कोई प्ले ग्राउंड नहीं

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भिवानी में 742 में से 715 स्कूलों में कोई प्ले ग्राउंड नहीं (जागरण फाइल फोटो)



सुरेश मेहरा, भिवानी। आधुनिकता के दौर में बच्चों के हाथों में टैब तो है पर उनके सेहत सुधारने के लिए पैरों के नीचे खेल मैदान नहीं है। ऐसे में देश की कर्णधार भावी पीढ़ी कैसे सेहतमंद होगी।

यूं कहें कि जिले के 742 में से 715 स्कूलों में खेल मैदान नहीं हैं। प्राइमरी स्कूलों की हालत तो और ज्यादा खराब है और बचपन कमरों में उछल कूद को मजबूर है। खेल मैदान उपलब्ध नहीं हैं। खेल मैदानों के अभाव के चलते बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है। उनको मानसिक तनाव अपनी जद में ले रहा है। मोबाइल की निर्भरता के चलते आंखें भी छोटी उम्र में खराब हो रही हैं। शिक्षा विभाग को समय रहते संभलना होगा।
तकनीकी शिक्षा बढ़ाने को टैब तो आए पर खेल का बुनियादी ढांचा सुधारिये

बच्चों में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए टैब लाना तो अच्छी बात है पर बच्चों की सेहत सुधरे इसके लिए खेल और खेल मैदानों का बुनियादी ढांचा भी सुधारिये। 715 स्कूलों में खेल मैदान नहीं होना चिंताजनक बात कही जा सकती है। इस पर शिक्षा विभाग को गंभीरता से गौर करने की जरूरत है।
130 सीनियर सेकेंडरी और 58 हाई स्कूलों में भी खेल मैदान नहीं

इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि जिले के 130 स्कूल और 58 हाई स्कूल खेल मैदानों के अभाव में पढ़ाई करवा रहे हैं। विद्यार्थी खेलें तो कहां खेलें। माध्यमिक स्कूल भी 80 हैं जो खेल सुविधाओं से वंचित हैं। प्राइमरी स्कूलों की तो बात ही छोड़िये। इनमें 447 में से पांच सात को छोड़ दें ताे किसी में खेल मैदान नहीं हैं।
बच्चों में बढ़ता मोटापा और खराब होती आंखें चिंताजनक

अभिभावक खुद चिंतित हैं और कह रहे हैं कि बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है। लगातार मोबाइल या टैब पर रहने से उनकी आंखें कमजोर हो रही हैं वहीं मोबाइल पर बढ़ती निर्भरता उनको मानसिक तनाव भी दे रहे हैं।


बच्चों के लिए स्कूलों में खेल मैदान और खेल सुविधाएं होना जरूरी है। बच्चे स्वस्थ नहीं होंगे तो कैसे उनका विकास हो सकेगा। ऐसे में शिक्षा विभाग ने इस पर तुरंत प्रभाव से ध्यान देना चाहिए।- बृजपाल परमार, अध्यक्ष

स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन


बच्चों में आजकल तनाव, मोटापा, आंखों की समस्याएं बढ़ रही हैं। उनको स्वजन के साथ खेलना, स्कूल में खेल मैदानों का होना जरूरी है। बच्चों का बचपन स्वस्थ हो, उनकी सेहत अच्छी हो इसके लिए जरूरी है उनको खेल मैदान मिलें। बच्चे आपस में मिल कर खेलें कूदें तो उनकी सेहत अच्छी रहेगी। इस पर हम सबको ध्यान देना चाहिए। डॉ. रघुबीर शांडिलय, सीएमओ, चौ. बंसीलाल नागरिक अस्पताल
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