ग्लोबल कंपनियों का नया डेस्टिनेशन बना यूपी: 1000 जीसीसी के जरिए 5 लाख युवाओं को मिलेगी हाई-प्रोफाइल नौकरी
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/13/article/image/yogi_22dec-1768306374202.jpgडिजिटल टीम, लखनऊ। उत्तर प्रदेश अब केवल विनिर्माण (Manufacturing) ही नहीं, बल्कि वैश्विक बौद्धिक संपदा और उच्च-स्तरीय सेवाओं का भी केंद्र बन रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन और \“जीसीसी नीति 2024\“ की सफलता का परिणाम है कि प्रदेश तेजी से ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) के लिए पसंदीदा गंतव्य बनकर उभरा है। राज्य सरकार ने अगले कुछ वर्षों में प्रदेश में 1000 से अधिक जीसीसी स्थापित करने और इनके माध्यम से 5 लाख से अधिक युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का रोजगार दिलाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
नीतिगत स्पष्टता से बढ़ा वैश्विक भरोसा
उद्योग जगत के विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती नियमों की अनिश्चितता रही है। योगी सरकार ने जीसीसी नीति के माध्यम से एक पारदर्शी और दीर्घकालिक ढांचा पेश किया है।
[*]भरोसे का वातावरण: नियमों की स्पष्टता और सिंगल विंडो सिस्टम ने निवेश के निर्णयों में तेजी लाई है।
[*]वर्तमान स्थिति: इसी अनुकूल वातावरण का परिणाम है कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में लगभग 90 जीसीसी सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
[*]शुरुआती लागत में कमी: सरकार द्वारा दिए जा रहे भूमि आधारित प्रोत्साहन और पूंजीगत सब्सिडी निवेशकों की शुरुआती लागत को कम कर रहे हैं, जिससे कंपनियां स्थायी ढांचा खड़ा करने के लिए प्रेरित हो रही हैं।
पलायन पर लगेगी लगाम: हाई-वैल्यू रोजगार का सृजन
जीसीसी के आगमन से उत्तर प्रदेश में रोजगार का स्वरूप पूरी तरह बदलने वाला है। अब राज्य का युवा केवल क्लर्क या श्रमिक नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रोफेशनल बनेगा।
[*]प्रमुख क्षेत्र: सूचना प्रौद्योगिकी (IT), डेटा एनालिटिक्स, इंजीनियरिंग, एआई (AI) और प्रबंधन।
[*]अंतरराष्ट्रीय अनुभव: स्थानीय युवाओं को अपने ही राज्य में वैश्विक कार्य-संस्कृति और उच्च वेतन वाले पदों पर काम करने का अवसर मिलेगा।
[*]ब्रेन ड्रेन पर नियंत्रण: बेहतर अवसरों के अभाव में दूसरे राज्यों या देशों में जाने वाली यूपी की मेधावी प्रतिभाएं अब राज्य के विकास में योगदान देंगी।
क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने की मुहिम
योगी सरकार केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है। जीसीसी नीति के तहत कम विकसित क्षेत्रों में निवेश करने वाली कंपनियों को विशेष प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। जब वैश्विक कंपनियां इन क्षेत्रों में अपने केंद्र खोलेंगी, तो वहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और बुनियादी ढांचे में सुधार होगा। समयबद्ध क्रियान्वयन और जवाबदेही तय होने से निवेशक अब उत्तर प्रदेश को \“रिजल्ट ओरिएंटेड\“ राज्य के रूप में देख रहे हैं।
$1 ट्रिलियन इकोनॉमी का आधारस्तंभ
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश को एक नॉलेज-आधारित अर्थव्यवस्था में बदल देगा। 1000 जीसीसी का लक्ष्य न केवल प्रदेश की जीडीपी में बड़ा योगदान देगा, बल्कि यूपी को बेंगलुरु और हैदराबाद की कतार में लाकर खड़ा कर देगा।
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