जम्मू-कश्मीर सरकार का आतंकी मददगारों पर बड़ा एक्शन, उपराज्यपाल सिन्हा ने 5 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/13/article/image/LG-Sinha-action-on-government-employees-1768298368341.jpgये कर्मचारी सरकार से वेतन लेकर आतंकवादियों के लिए काम कर रहे थे।
नवीन नवाज, श्रीनगर। हिजबुल मुजाहिदीन के आप्रेशनल कमांडर मोहम्मद अमीन बाबा उर्फ आबिद को नकली पासपोर्ट के सहारे पाकिस्तान भागने और उसे अटारी वाघा बार्डर तक पहुंचाने में लिप्त रहे उसके दो सहयोगियों समेत पांच आतंकी मददगारों की सरकारी सेवाएं मंगलवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने समाप्त कर दी।
आपको बता दें कि जम्मू कश्मीर में उपराज्यपाल पद पर आसीन होने के बाद उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू कश्मीर के प्रशासनिक तंत्र में छिपे बैठे आतंकियेां और अलगाववादियों के समर्थकों, साथियों व ओवरग्राउंड वर्करों को बेनकाब करने और उनके खिलाफ कार्रवाई का एक अभियान चला रखा है। इस अभियान के तहत अब तक लगभग 90 व्हाइट कालर आतंकियों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं।
आज बर्खास्त किए गए सरकारी कर्मियों में अध्यापक मोहम्मद इश्फाक, स्वास्थ्य विभाग का लैब टैक्निशियन तारिक अहमद शाह, जलशक्ति विभाग का लाइनमैन बशीर अहमद, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग का चालक मोहम्मद यूसुफ राथर और वन विभाग का फील्ड वर्कर फारुक अहमद बट शामिल हैं।
ऑपरेशनल कमांडर को अटारी वाघा तक पहुंचाने में की मदद
तारिक अहमद राह और फारूक अहमद बट ने ही वर्ष 2005 में एक पूर्व विधायक की मदद के सहारे हिजबुल मुजाहिदीन के ऑपरेशनल कमांडर मोहम्मद अमीन को श्रीनगर से अटारी वाघा तक पहुंचाया था। तारिक और आतंकी कमांडर दोनों आपस में चचेरे भाई हैं।
संबधित अधिकारियों ने बताया कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इन व्हाईट कालर आतंकियों की सेवाओं को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311 के प्रविधान दो के तहत समाप्त किया गया है।
मौजूदा वर्ष यह पहला अवसर है जब उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकी पारिस्थितिक तंत्र को पूरी तरह समाप्त करने के अभियान के तहतसरकारी विभागों में छिपे आतंकियों के मददगारों की सेवाएं समाप्त की हैं।बीते वर्ष 2025 में उपराज्यपाल ने 30 अक्टूबर को दो सरकाीर अध्यापकों की सेवाएं समाप्त की थी और उससे पहले 22 अगस्त को दो , तीन जून को तीन व 15 फरवरी को आतंकियों के मददगार तीन सरकारी कर्मियों की सेवाएं समाप्त की थी।
उपराज्यपाल की कार्रवाई न्याय की भावना से प्रेरित
जम्मू-कश्मीर मामलों के जानकार सलीम रेशी ने कहा कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बीते पांच वर्ष के दौरान बहुत ही सुनियाेजित तरीके से आतंकी पारिस्थितिक तंत्र को समाप्त करने का जो अभियान चला रखा है, सराहणीय है। यह न्याय की भावना से प्रेरित है, जिसमें आतंकियों औरउनके मददगारों को सरकारी नौकरी से निर्णायक रूप से हटाने के साथ साथ आतंकी हिंसा के वास्तविक पीड़ितों को नौकरी देकर उन्हें जीवन में आगे बढ़ने का एक सम्मानजनक अवसर प्रदान किया है।
यह उपराज्यपाल की दृढ़ इच्छाशक्ति, संकल्पबद्धता और उनके नेतृत्व कार्यकुशलता को दर्शाता है।मासूमों के प्रति हमदर्दी रखने वाले लेकिन आतंकवादियों से कोई समझौता न करने वाले, उन्होंने आतंक और उसके समर्थकों के लिए शून्य सहिष्णुता दिखाई । सरकारी तंत्र में छिप आतंकी तत्व जिन्हें हम व्हाईट कालर आतंकी कहते हैं,आतंकी संगठनों और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ द्वारा सरकारी तंत्र में प्लांट किए गए वहटाइम-बम हैं जो बहुत ही ज्यादा घातक हैं। यह कई दशकों में सरकारी मशीनरी को कमजोर करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचाते हैं।
अमीन बाबा को तारिक और फारूक अहमद बट ने पहुंचाया पाकिस्तान
जम्मू कश्मीर में वर्ष 2004-05में आतंक का पर्याय बने हिजबुल मुजाहिदीन के आप्रेशनल कमांडर माेहम्मद अमीन बाबा उर्फ आबिद को सुरक्षा एजेंसियां लगातार तलाश रही थी,लेकिन वह नहीं मिल रहा था। पता चला कि वह पासपोर्ट के सहारेअटारी वाघा बार्डर,अमृतसर में रेलगाड़ी में बैठा और पाकिस्तान पहुंच गया।उसे भगाने में नेशनल कान्फ्रेंस के एक पूर्व विधायक गुल रफीकी की भूमिका भी सामने आयी । गुल रफीकी को इस मामले में गिरफ्तार भी हुआ और जेल भी गया।
पाकिस्तान में कुछ समय तक वह शांत रहा और बीते सात वर्ष से वह फिर सक्रिय हो उठा है। उसने गुलाम जम्मू कश्मीर में हिजबुल मुजाहिदीन के ट्रेनिंग कैंपों की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ लश्कर, जैश के आतंकी कमांडरोे के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर मे आतंकी हमलों के षड्यंत्र रचने व उन्हें पूरा करने के लिए कश्मीर में स्थानीय आतंकी कैडर जुटाने में अहम भूमिका निभा रहा है। जब वह पाकिस्तान भागा था तो उस समय उस पर 10 लाख का ईनाम घोषित था।
एनआइए की जांच में सामने आए तारिक और फारूक के नाम
वर्ष 2023 में जम्मू-कश्मीर पुलिस की प्रदेश जांच एजेंसी एसआइए ने इस अमीन बाबा की गतिविधियों को लेकर उसके स्थानीय नेटवर्क के जब तार खंगालना शुरु किए तो लैब टैक्निशयन तारिक अहमद राह और वन विभाग के फारूक अहमद बट नजर में आए। तारिक अहमद राह वर्ष 2011 में कान्ट्रैक्ट के आधार पर लैब टेक्नीशियन के तौर पर भर्ती हुआ था और वर्ष2016 मेंस्वास्थ्य विभगा में उसकीलैब टेक्नीशियन के तौर पर नियुक्ति पक्की हो गई। वह उपजिला अस्पताल बिजबेहाड़ा अनंतनाग में तैनात था। जांच में पता चला कि वह अपनी किशोरावस्था से ही हिजबुल मुजाहिदीन के लिए काम करता आया है।
जांच में पता चला कि पाकिस्तान भागने वाला हिजबुल मुजाहिदीन काकमांडर मोहम्मद अमीन बाबा रिश्तेदारी में उसका चाचा है। तारिक ने वर्ष 2005 में अमीन बाबा को अनंतनाग में रहने में मदद की और बाद में उसे अटारी-वाघा बॉर्डर तक पहुंचाने का इंतज़ाम किया। तारिक सरकारी सेवा में शामिल होने के बाद भी आतंकी गतिविधियों में सहयोग कर रहा था और अनंतनाग-बिजबेहाड़ा इलाके में आतंकी नेटवर्क तैयार करने, नए लड़कों कीभर्ती के षडयंत्र में लगा हुआ था।
उसके बारे में आवश्यक सुबूत जुटाने के बाद पुलिस ने उस गैर कानूनी गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम के तहत गिरफतार कर जेल भेजा। बाद में वह जमानत पर रिहा हो गया ,लेकिन उसने आतंकियों के साथ अपना संपर्क बहाल रखते हुए आतंकी भर्ती का षडयंत्र पुन: चलाने का प्रयास किया,लेकिन त्वरित कार्रवाई से उसे विफल बनाया गया।
बाबा को भगाने में फारूक ने की थी मदद
मोहम्मद अमीन बाबा को कश्मीर से भगाने में वन विभाग के अनंतनाग स्थित कार्यालय में तैनात फील्ड वर्कर फारूक अहमद बट ने मुख्य भूमिका निभाई थी। वह हिजबुल मुजाहिदिन के एक सक्रिय कैडर के रूप में काम करता था और किसी तरह नेशनल कान्फ्रेंस के एक पूर्वविधायक गुल रफीकी के साथ उसके निजि सहायक के रूप में जुढ़ गया। एसआइए ने अपनीजांच में पाया कि फारूक ने हीतारिक कोअमीन बाबा को पाकिस्तान भगाने की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में मदद की।
उसने पुलिस व अन्य सुरक्षा एजेंसियों के नाके पार कराने के लिएअपने सरकारी पहचानपत्र का इसतेमाल किया। उसने ही मोहम्मद अमीन बाबा कोपूर्व विधायक ने अपने सुरक्षा दस्ते और चालक के साथ सरकारी जिप्सी उपलब्ध कराई थी। फारूक को गत वर्ष जमानत मिली थी,लेकिन वह फर आतंकी गतिविधियों में सक्रिय हो गया है और उसकी गतिविधियों का संज्ञान लेते हुए उसकी व तारिक दोनों की सेवाएं समाप्त की गई हैं।
एंबुलेंस में अस्पताल पहुंचाने के बजाय मौत के सौदागरों की करता था सेवा
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा सोमवार को बर्खास्त किया गया मोहम्मद यूसुफ वर्ष 2009 में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में बतौर चालक भर्ती हुआ थ। वह बेमिनाश्रीनगर में तैनात था। वह पकािस्तान में बैठे हिजबुल मुजाहिदीन के एक नामी कमांडर बशीर अहमद बट के साथ लगातार संपर्क में थ और उसके कहने पर श्रीनगर समेत घाटी के विभिन्न भागों में सक्रिय आतंकियों की मदद करता था। उन्हें सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाने व उनके लिए हथियार व अन्य सामान जुटाने का काम करता था।
बशीर अहमद बट के कहने पर उसने गांदरबल में आतंकियों के लिए हथियार औरपैसे पहुंचाने का काम संभाला। पुलिस ने उसे उसके एक अन्य साथी ईशान हमीद संग 20 जुलाई 2024 को गिरफ्तार किया। दोनों एक वाहन में थे,जिसकी तलाशी लेने पर पुलिस नेएक पिस्तौलगोला-बारूद, ग्रेनेड और पांच लाख रुपये की भारतीय मुद्रा बरामद की। पूछताछ में यूसुफ ने बताया कि वह वह अस्पताल का वाहन चालक होने की आड़ में आतंकियों की लगातार मदद कर रहा था। उसने यह भी बताया कि वह जेल में बंद आतंकियों का उनके पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों के साथ संपर्क सुनिश्चित बनाए रखने के लिए समय समय पर उन्हें मोबाइल फोन भी उपलब्ध कराता था।
लोगों के घर में पेयजल पहुंचाने की आड़ में घुसपैठियों को ला रहा था कश्मीर
आतंकियों के मददगार होने पर सरकारी सेवा से बर्खास्त होने वाले बशीर अहमद मीर एलओसी के साथ सटे गुरेज, बांडीपोर का रहने वाला है। वह वर्ष 1988 मेंपब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग में दैनिक वेतनभोगी के रूप में भर्ती हुआ और1996 में वह सहायक लाइनमैन के रूप में नियमित हो गया। इसी दौरान वह लश्कर ए तैयबा का एक ओवरग्राउंड वर्कर बन गया और आतंकियों की मदद करने लगे।
वह गुलाम जम्मू कश्मीर से आने वाले आतंकियों की घुसपैठ को सुरक्षित बनाने, उन्हें उनके ठिकानों तक सुरक्षित पहुंचाने और सुरक्षाबलों की गतिविधियों की खबरें आतंकियों तक पहुंचाने का काम कर रहा था सितंबर 2021 में उसने अपने घर में लश्कर के दो आतंिकयों को रखा हुआ था कि पुलिस को पता चल गया। पुलिस ने जब कार्रवाई की तो वहां हुई मुठीोड़ में दोनों आतंकी मारे गए और वहां से दो एसाल्ट राइफलों समेतबड़ी मात्रा में गोला-बारूद भी बरामद किया गया। बशीर अहमद मीर भी पकड़ा गया,लेकिन बाद में वह स्वास्थ्य का हवाला देकर जमान पर छूट गया।
स्कूल में ही नहीं जेल में भी पढ़ा रहा था जिहादी पाठ
जिला डोडा का रहने मोहम्मद इश्फाक स्कूल शिक्षा विभाग में रहबर-ए-तालीम योजना के तहत अध्यापक नियुक्त हुआ था ओर वर्ष 2013 में उसकी सेवाएं नियमित हुई। वह सिर्फ दिखावे के लिए एक अध्यापक था और स्कूल में बच्चों को जिहादी तालीम देते हुए उन्हें भारत के खिलाफ हथियार उठाने, गैर मुस्लिमों को नुक्सान पहुंचाने के लिए उकसाता था। वह लश्कर कमांडर मोहम्मद अमीन उर्फ अबू खुबैब के साथ नियमित संपर्क में रहते हुए रामबन-डोडा-किश्तवाड़ में ही नहीं प्रदेश के अन्य भागों में भी लश्कर के आतंकियों के लिए विभिन्न प्रकार से मदद जुटाता था।
पाकिस्तान में बैठे अबु खुबैब ने उसे 2022 की शुरुआत में डोडा में एक पुलिस अधिकारी की हत्या का जिम्मा सौंपा था। लेकिन उसे नहीं पता था कि इश्फाक की हरकतों पर खुफिया एजेंसियों की नजर है। इससे पहलेकि वह पुलिस अधिकारी की हत्या को अंजाम देता पुलिस ने उसे मढ़ीन स्थित एक अन्य आतंकी मददगार की निशानदेही पर उसे पकड़ लिया।
इश्फाक और उसके साथी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने हथियार और गोला-बारूद बरामद किया और पूछताछ में पता चला कि इश्फाक ने कई युवाओं को आतंकी बनने के लिए गुमराह किया है। जेल में रहते हुए भी वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया और जेल में बंद विभिन्न कैदियों के साथ लगातार संपर्क करते हुए उन्हें आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए तैयार करता पाया गया है।
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