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गाजियाबाद में नमो भारत को मेट्रो से जोड़नेवाला एफओबी खुला, ट्रैवेलेटर के लिए करना होगा छह माह इंतजार

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नमो भारत स्टेशन को मेट्रो स्टेशन से जोड़ने के लिए बनाए गए एफओबी को बिना ट्रैवेलेटर लगाए ही खोल दिया गया है।



जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। नये बस अड्डे पर नमो भारत स्टेशन को मेट्रो स्टेशन से जोड़ने के लिए बनाए गए एफओबी को बिना ट्रैवेलेटर लगाए ही खोल दिया गया है। अभी ट्रैवेलेटर लगने में छह माह का समय लगेगा।

लोगों का कहना है कि बिना ट्रैवेलेटर के आफओबी शुरू होने से उन्हें ज्यादा फायदा नहीं मिला है। हालांकि एफओबी खुलने से अब यात्रियों को नमो भारत स्टेशन से मेट्रो पकड़ने के लिए सड़क पर नहीं उतरना होगा। वह ट्रैवेलेटर पर खड़े होकर मेट्रो स्टेशन पर पहुंच जाएंगे।

गाजियाबाद के नये बस अड्डे पर सबसे अधिक भीड़ और यातायात रहता है। यहां सड़क पार करना लोगों के लिए मुश्किल होता है। नमो भारत ट्रेन से काफी संख्या में लोग मेट्रो स्टेशन जाते हैं। ऐसे में उन्हें स्टेशन मेट्रो पकड़ने के लिए सड़क पर आना होता है। यात्री जान जोखिम में डालकर सड़क पार करते हैं।

इसको ध्यान में रखकर प्रवेश-निकास द्वार को मल्टी-माडल इंटीग्रेशन के तहत एफओबी के जरिए नमो भारत स्टेशन को शहीद स्थल न्यू बस अड्डा मेट्रो स्टेशन से जोड़ा जा रहा है। इस ब्रिज पर यात्रियों की सुविधा के लिए ट्रैवेलेटर लगाया जाना है। एनसीआरटीसी ने पूर्व में दावा किया था कि ट्रैवेलेटर लगाकर इसे शुरू किया जाएगा। एफओबी बनकर तैयार हो गया है। अभी ट्रैवेलेटर नहीं लगा है।

प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री नमो भारत स्टेशन से मेट्रो को पकड़ने के लिए सड़क पर उतरकर ट्रैफिक के बीच से होकर मेट्रो स्टेशन पहुंच रहे थे। यात्रियों को परेशानी को देखते हुए ट्रैवेलेटर लगाए बिना इसे खोेल दिया गया है। एफओबी खुलने पर भी ट्रैवेलेटर का काम रात में चलता रहेगा। इसके लगने में छह माह का समय लगेगा।

ट्रैवेलेटर से महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों को परेशानी नहीं होगी। एफओबी की लंबाई लगभग 300 मीटर और चौड़ाई 6.5 मीटर है।एनसीआरटीसी के सीपीआरओ पुनीत वत्स ने बताया कि ट्रैवेलेटर लगाने का काम चल रहा है। छह माह में यह पूरा हो जाएगा।
क्या होता ट्रैवेलेटर

एफओबी पर बना ट्रैवेलेटर लोगों को बिना ज्यादा थके, कम समय में और सुरक्षित तरीके से एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचाता है। ट्रैवेलेटर दिखने में कन्वेयर बेल्ट जैसा होता है, जो मोटर की सहायता से धीरे-धीरे चलता रहता है। यात्री इस पर एक जगह खड़े होकर आगे बढ़ते है।

यह विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग व्यक्तियों, भारी सामान के साथ यात्रा करने वालों और बीमार यात्रियों के लिए फायदेमंद होता है। ट्रैवेलेटर आमतौर पर बिजली से संचालित होता है और इसमें सुरक्षा के लिए हैंडरेल, आपातकालीन स्टाप बटन और फिसलन-रोधी सतह होती है।

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