UP: गंगा की कोख में अवैध खेती का खेल खत्म! प्रशासन ने शुरू किया गोपनीय चिन्हांकन, सैकड़ों बीघा जमीन होगी मुक्त
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/13/article/image/GANGA-RIVER-IN-SAMBHAL-1768326487741.jpgगंगा का किनारा
संवाद सहयोगी, जागरण, बहजोई। जनपद में गंगा किनारे फैली सरकारी भूमि पर वर्षों से हो रही अवैध खेती अब प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। गुन्नौर क्षेत्र में ग्राम पंचायतों की गंगा रेत और सिंचाई विभाग की भूमि पर कब्जा कर खेती किए जाने की लगातार शिकायतों के बीच अब पूरे मामले को गोपनीय तरीके से खंगाला जा रहा है, जिसमें ग्राम प्रधानों, लेखपालों और स्थानीय जिम्मेदारों की भूमिका पर भी जांच हो रही है।
गुन्नौर क्षेत्र में गंगा किनारे स्थित ग्राम पंचायतों की गंगा रेत की भूमि और सिंचाई विभाग की जमीन पर हो रही अवैध खेती को लेकर पुलिस और प्रशासन संयुक्त रूप से गोपनीय स्तर पर तैयारी में जुटा है, जहां फोकस सीधे तौर पर भूमि के चिन्हांकन और उस पर खेती करने वालों की पहचान पर है।
दरअसल, 38 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत करीब 44 गांव ऐसे हैं, जहां सैकड़ों बीघा ग्राम सभा, सिंचाई विभाग और अन्य सरकारी भूमि पर कब्जा कर खेती की जा रही है। बताया जा रहा है कि हर वर्ष गंगा के जलस्तर घटने के बाद ग्राम सभा और सिंचाई विभाग की ओर की ऐसी भूमि सामने आती है, जो जलोढ़ मिट्टी के कारण अत्यंत उपजाऊ होती है।
जहां गंगा का पानी नहीं पहुंचता वहां गेहूं और कई स्थानों पर गन्ने की खेती भी कर ली जाती है। खास तौर पर बबराला से पश्चिम दिशा में शाहजहानाबाद से लेकर चाऊपुर डांडा तक सैकड़ों बीघा भूमि ग्राम सभा के अंतर्गत आती है, जिस पर पंचायत स्तर से जुड़े दबंग लोग अस्थाई कब्जा कर खेती कर लेते हैं।
इसका वास्तविक लाभ गांव के काम या पंचायत को नहीं मिल पाता। इसी तरह बबराला के राजघाट से लेकर नरौरा तक सिंचाई विभाग की भूमि और नरौरा से जुनावई क्षेत्र में भी ग्राम सभा की जमीन पर हर वर्ष इस तरह की खेती होती है। आरोप है कि ग्राम प्रधानों और पंचायत से जुड़े जिम्मेदारों की अनदेखी या मौन सहमति के बिना इतने बड़े स्तर पर यह प्रक्रिया संभव नहीं है।
यह सब हर वर्ष दोहराया जाता है और तहसील प्रशासन तक इसकी ठोस जानकारी नहीं पहुंच पाती। अब पूरे मामले में भूमि को पहले कागजी और भौतिक स्तर पर चिन्हित किया जा रहा है, ताकि आगे की कार्रवाई में किसी भी स्तर पर भ्रम की स्थिति न रहे।
समय-समय पर गंगा किनारे और अन्य सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और खेती की शिकायतें प्राप्त होती रहती हैं, जिनकी जांच नियमानुसार कराई जाती है। वर्तमान में कोई विशेष या अलग से अभियान चलने की बात नहीं है, लेकिन जो भी शिकायतें आती हैं, उन पर जांच की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और आवश्यकता पड़ने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
- अवधेश वर्मा, एसडीएम, गुन्नौर।
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