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पूर्णिया मेडिकल कॉलेज में बड़ा फर्जीवाड़ा! 8 छात्रों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र फर्जी, जांच में खुलासा

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राजीव कुमार, पूर्णिया। जीएमसीएच में नामांकन के लिए पहुंचे कार्तिक यादव के दिव्यांगता प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया है। इस बात पर आइजीएमएस की तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने बेरा जांच की रिपोर्ट ने मुहर लगा दी है। आइजीएमएस पटना की तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने अपनी जांच रिपोर्ट में यह माना है कि बेरा जांच में कार्तिक यादव की हेयरिंग नार्मल रेंज की है, जबकि जिस दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर कार्तिक पूर्णिया मेडिकल कालेज में नामांकन के लिए पहुंचा था, उसमें उसे कान का 44 फीसदी दिव्यांग माना गया है।

इस मामले में पूर्णिया मेडिकल कालेज प्रशासन ने कार्तिक यादव के खिलाफ थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामला थाने में दर्ज होने के बाद पुलिस ने न्यायालय के निर्देश पर इस मामले में आइजीएमएस पटना में गिरफ्तार कार्तिक की बेरा जांच कराई। इस मामले में आइजीएमएस के चिकित्सा अधीक्षक डा. मनीष कुमांर मंडल ने बताया कि कार्तिक की जांच के लिए ईएनटी विभाग की ओपीडी में पंजीयन कराया गया था।

इसके बाद कार्तिक की ईएनटी के अलावा पीएमआर व न्यूरो के विशेष चिकित्सक की टीम द्वारा भी जांच कर अपनी अलग-अलग रिपोर्ट दी गयी। जिसके बाद तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि बेरा जांच में कार्तिक की हेयरिग नार्मल है। बताया जाता है कि वर्ष 2023 से सौ सीटों में नामांकन की मान्यता मिलने के बाद पूर्णिया मेडिकल कालेज में एमबीबीएस का नामांकन शुरू हो गया लेकिन यहां दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर जिन छात्रों का नामांकन हुआ उसकी दो वर्षों तक जांच नहीं कराई गयी।

दिव्यांगता कोटे से पूर्णिया मेडिकल कालेज में हर वर्ष पांच से छह छात्रों का नामांकन एमबीबीएस में होता रहा। दो वर्षों में पूर्णिया मेडिकल कालेज के प्राचार्य के रूप में प्रभार संभालने वाले तीन प्राचार्य में से किसी ने इन प्रमाण पत्रों की ना कोई जांच कराई और ना ही उन संस्थानों से इन दिव्यांगता प्रमाण पत्र के बारे में जानकारी मांगी।
पुलिस इस फर्जीवाड़ा की जानकारी भेजेगी आर्थिक अपराध इकाई को

पूर्णिया मेडिकल कालेज में एक के बाद एक आठ एमबीबीएस करने वाले छात्रों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने के बाद अब पुलिस इस मामले की रिपोर्ट आर्थिक अपराध इकाई को भेजने की तैयारी कर रही है। आर्थिक अपराध इकाई राज्य में इस तरह के मामलों की जांच के लिए नोडल एजेंसी मानी जाती है। कार्तिक यादव के प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने के अलावा सात अन्य छात्रों के भी दिव्यांग प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं।

कार्तिक यादव सीतामढ़ी का रहने वाला है। इसके अलावा मो. शाहबुद्दीन, फरहत शमीम, अजीत कुमार, मोहसिन फहीम, मो. अतील अजहर, मो. रसीद अहमद एवं मुद्दसिर गयाजी शामिल है। इस फर्जीवाड़ा का दायरा जिस तरह से बढ़ता जा रहा है इस कारण पुलिस इस मामले की जांच का अनुरोध आर्थिक अपराध इकाई से कर सकती है।
गिरफ्तार कुणाल ने ही कार्तिक को फंसाया था इस खेल में

फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर नामांकन लेने वाले जिस कार्तिक यादव को पुलिस ने गिरफ्तार किया उसके साथी कुणाल कुमार को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। कुणाल गया मेडिकल कालेज का छात्र है तथा कर्तिक के साथ उसका पूर्णिया मेडिकल कालेज में नामांकन कराने वही आया था। कुणाल ने ही कार्तिक को दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर मेडिकल कालेज में नामांकन का खेल समझाकर इसमें फंसाया था। कुणाल के पास से जांच में कई बैंकों के क्रेडिट कार्ड मिले थे।

कुणाल के पास से एएन मगध मेडिकल कालेज का आइडी कार्ड के अलावा उसके पास से एक काले रंग का आइफोन एवं एक नीला रंग का आइफोन बरामद किया गया था। इसके अलावा कुणाल के पास से कुणाल कुमार लिखा हुआ एक्सिस बैंक का दो क्रेडिट कार्ड, स्टेट बैेक एवं पंजाब नेशनल बैंक का क्रेडिट कार्ड के अलावा नीले रंग का रूपये कार्ड भी बरामद किया गया। इसके अलावा कुणाल कुमार का ड्राइविंग लाइसेंस एवं एक कुणाल के पिता राकेश कुमार के नाम का एक क्रेडिट कार्ड भी बरामद हुआ है। कुणाल वार्ड संख्या 32 शांति नगर, डूमरा, थाना पुनौरा, जिला सीतामढ़ी का रहने वाला है।
कुणाल ने ही बनवाया था महाराष्ट्र से यूडीआइडी

पूर्णिया मेडिकल कालेज में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के मामले में जो छात्र कार्तिक यादव गिरफ्तार किया गया है उसका यूडीआइडी कार्ड नंबर (विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र) महाराष्ट्र से निर्गत हुआ है। यह भी उसके सहयोगी छात्र कुणाल ने ही बनवाया था।

कार्तिक का यूडीआइडी नंबर एमएच 4890420040025840 है जो 21 अगस्त 2025 को बना है। इसमें कान का विकलांगता का प्रतिशत 44 बताया गया है। इस यूडीआइडी के आधार पर गोवा मेडिकल कालेज गोवा से 30 सितंबर 2025 को दिव्यांगता प्रमाण पत्र निर्गत किया गया गया।
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