Chikheang Publish time 1 hour(s) ago

3 साल पहले छोटी शुरुआत, आज 4-5 लाख का कारोबार, गोपालगंज में सब्जी की खेती से भर रही 15 गांवों के किसानों की झोली

https://www.jagranimages.com/images/2026/01/14/article/image/Gopalganj-News-(22)-1768335775263.jpg

सब्जी की खेती से भर रही 15 गांवों के किसानों की झोली। फोटो जागरण



जागरण संवाददाता, गोपालगंज। सब्जी की खेती से भोरे व फुलवरिया प्रखंड के 15 गांवों के किसानों की झोली भर रही है। इन गांवों में तैयार होने वाली सब्जी आज उत्तर प्रदेश के बाजारों तक पहुंच रही है। फुलवरिया प्रखंड के श्रीपुर व मजिरवां गांव के तीन किसानों ने सब्जी की खेती की। यह पहल चार साल पहले की थी।

चार साल की लंबी अवधि बीतने के बाद आज फुलवरिया व भोरे प्रखंड के 15 गांवों के किसान सब्जी का उत्पादन बड़े पैमाने पर कर रहे हैं। इससे इन गांवों के करीब तीन सौ परिवार के लोग अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। आज सब्जी के उत्पादन में अग्रणी स्थान बनाकर यहां के किसान प्रतिदिन अच्छी कमाई कर खुद व इलाके का भविष्य संवार रहे हैं। यहां पैदा होने वाली सब्जी सीमावर्ती उत्तर प्रदेश तथा बिहार के गंगा तट पर बसे शहरों तक में जाती है।

एक जमाना था कि झरही नदी के किनारे के लोगों को ढंग का भोजन तक उपलब्ध नहीं था। दो दशक पूर्व तक इस इलाके लोग कोन व सुथनी के उत्पादन तक ही सिमट गए थे। यहां की मिट्टी पर गेहूं तथा धान का उत्पादन नहीं के बराबर होता था। समय के साथ किसानों ने इस इलाके की जमीन की कीमत को तब जाना जब उन्हें सब्जी की खेती करने के तौर तरीकों की जानकारी मिली।

तीन साल पूर्व मजिरवां व श्रीपुर गांव के किसानों ने काफी कम भू-भाग पर सब्जी की खेती करने की पहल की। कुछ हर समय में सब्जी की खेती को लाभप्रद देखकर किसानों ने बड़े पैमाने पर इसकी खेती शुरू कर दी। आज स्थिति यह है कि भोरे तथा फुलवरिया प्रखंडों के कल्याणपुर, मगहिया, चौतरवां, विशुनपुरा, श्रीपुर, रकबा खाप, गिदहां, लछन टोला, सोनगढ़वा तथा हाथीखाल जैसे 15 गांवों के किसानों की आजीविका का मुख्य साधन सब्जी की खेती हो गई है। इन गांवों से 300 से अधिक परिवारों के लोग सब्जी की बड़े पैमाने पर सब्जी की खेती कर रहे हैं।
सब्जी के लिए यहां की मिट्टी सोना

गिदहां बंगाली कालोनी के जयनाथ वर्मन पांच एकड़ में गोभी की खेती कर रहे हैं। वे बताते हैं कि हर तरह की सब्जी के लिए यहां की मिट्टी सोना है। चाहे बैगन की खेती हो या गोभी, कद्दू, मिर्च, सेम, केला, तरोई, नेनुआ, आलू व प्याज की खेती हो। यहां हरेक सब्जी का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। इसी गांव के गोविंद वर्मन चार एकड़ में गोभी की खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि यहां पैदा होने वाली सब्जी की बिक्री कोई समस्या नहीं है।
यूपी व मोतिहारी तक जाती है यहां की सब्जी

इस इलाके में सब्जी की खेती करने वाले किसानों ने बताया कि यहां पैदा होने वाली सब्जी गोरखपुर, देवरिया, पड़रौना, कुशीनगर, सिवान, छपरा, मोतिहारी, सलेमपुर, मैरवां, भाटपार, भटनी सहित कई बड़े बाजार में जाती है। यहां होने वाली सब्जी का बड़ा बाजार उपलब्ध है।
चार से पांच लाख तक होता है औसतन प्रतिदिन का सब्जी व्यवसाय

श्रीपुर में प्रतिदिन लगने वाली मंडी पर दैनिक रूप से नजर रखने वाले बड़े रैयत सवरु लाल चौहान ने बताया कि प्रतिदिन सभी प्रकार की सब्जियां को मिलाकर चार से पांच लाख रुपये का व्यापार हो जाता है। व्यापार का औसतन अनुमान सब्जियों के भाव में उतार-चढ़ाव पर भी निर्भर करता है।
Pages: [1]
View full version: 3 साल पहले छोटी शुरुआत, आज 4-5 लाख का कारोबार, गोपालगंज में सब्जी की खेती से भर रही 15 गांवों के किसानों की झोली

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com