JP Ganga Path: जेपी गंगा पथ और चार लेन सड़कों के निर्माण को मिली रफ्तार, नौ बालूघाटों का आवंटन स्वीकृत
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/14/article/image/J-P-ganga-path-1768372742185.jpgजेपी गंगा पथ और चार लेन सड़कों के निर्माण को मिली रफ्तार
राज्य ब्यूरो, पटना। पटना और वैशाली जिलों में चल रही महत्वपूर्ण सड़क एवं शहरी विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा और अहम फैसला लिया है। लोकहित को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नौ बालूघाटों के आवंटन प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। यह आवंटन कुछ आवश्यक शर्तों और बंधेजों के साथ बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (बीएसआरडीसीएल) को सौंपा गया है।
इस निर्णय के तहत पटना जिले के कुल सात बालूघाट और वैशाली जिले के दो बालूघाट बीएसआरडीसीएल को आवंटित किए गए हैं। पटना जिले में जिन बालूघाटों का आवंटन हुआ है, उनमें पटना गंगा-2, 2ए, 2बी, 2सी, 2डी, पटना गंगा-3ए और पटना गंगा-3बी शामिल हैं।
वहीं वैशाली जिले में वैशाली गंगा-6ई और वैशाली गंगा-6एफ बालूघाट को निगम को सौंपा गया है।
सरकार के इस फैसले से जेपी गंगा पथ समग्र उद्यान परियोजना (फेज-1) के निर्माण कार्य को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए आवश्यक निर्माण सामग्री, विशेषकर बालू की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।
इससे निर्माण कार्य में आ रही बाधाएं दूर होंगी और परियोजना को तय समय-सीमा के भीतर पूरा करना आसान होगा।
इसके साथ ही इस निर्णय का सीधा लाभ भद्रघाट से दीदारगंज पथ के चार लेन चौड़ीकरण एवं निर्माण कार्य तथा दीदारगंज–फतुहा–बख्तियारपुर–करजान (अथमलगोला) पथ के चार लेन चौड़ीकरण परियोजना को भी मिलेगा।
इन सड़कों के चौड़ीकरण से पटना और उसके आसपास के क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम होगा और आवागमन पहले की तुलना में अधिक सुगम बनेगा।
राज्य सरकार का मानना है कि बालूघाटों के आवंटन से निर्माण कार्यों में होने वाली अनावश्यक देरी पर रोक लगेगी। इससे न केवल परियोजनाओं की गति बढ़ेगी, बल्कि लागत में भी नियंत्रण रहेगा। बेहतर सड़क संपर्क से व्यापार, उद्योग और अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
कुल मिलाकर, यह निर्णय राजधानी पटना समेत आसपास के जिलों की आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे आम लोगों को बेहतर सड़क सुविधा मिलेगी, जाम की समस्या में कमी आएगी और शहरी विकास को नई गति प्राप्त होगी।
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