छह जिलों में आदिवासी छात्रों के लिए बनेंगे 15 नए छात्रावास, पीएम जनमन योजना से मिलेगा सहारा
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/14/article/image/OBC-1768373048995.jpgकैमूर, किशनगंज, कटिहार, मधेपुरा, भागलपुर और पूर्णिया जिले में छात्रावासों का होगा निर्माण
राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य सरकार ने आदिवासी छात्र-छात्राओं की शिक्षा को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस वर्ष बिहार के छह जिलों में आदिवासी छात्रों के लिए 15 नए छात्रावासों के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है। कैमूर, किशनगंज, कटिहार, मधेपुरा, भागलपुर और पूर्णिया जिले में बनने वाले इन छात्रावासों को लेकर शिक्षा विभाग ने सहमति दे दी है। अब इस प्रस्ताव को वित्त विभाग के अनुमोदन के बाद मंत्रिमंडल की बैठक में स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रत्येक छात्रावास के निर्माण पर करीब तीन करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इन छात्रावासों में 100-100 छात्रों के रहने की व्यवस्था होगी, जिससे बड़ी संख्या में आदिवासी छात्र-छात्राओं को लाभ मिल सकेगा।
नए वित्तीय वर्ष 2026-27 में पहले चरण के तहत इन 15 छात्रावासों का निर्माण कार्य शुरू करने की योजना है। भवन निर्माण विभाग के माध्यम से इन छात्रावासों के भवनों का निर्माण कराया जाएगा।
दूसरे चरण में भी सरकार ने विस्तार की योजना तैयार की है। इसके तहत जहानाबाद, नवादा, बक्सर और दरभंगा जिले में भी नए आदिवासी छात्रावासों के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया है।
इन सभी छात्रावासों का निर्माण पीएम जनमन योजना के तहत किया जाएगा। यह योजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों को मुख्यधारा से जोड़ना है।
इन छात्रावासों में सात जनजातीय समूहों के 15 से 18 वर्ष आयुवर्ग के छात्र-छात्राओं को रहने और खाने की सुविधा मिलेगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पीएम जनमन योजना का पूरा नाम प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान है।
इस योजना के अंतर्गत आदिवासी समुदायों को पक्के आवास, स्वच्छ पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और आजीविका के अवसर जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना लक्ष्य है।
वित्तीय ढांचे की बात करें तो इस योजना में केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत राशि उपलब्ध कराएगी। छात्रावास में रहने वाले सभी छात्र-छात्राओं को निःशुल्क आवास सुविधा दी जाएगी।
भोजन के लिए छात्रावास परिसर में कैंटीन की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि छात्रों को पौष्टिक और नियमित भोजन मिल सके।
इसके अलावा छात्रावासों में पढ़ाई के बेहतर माहौल पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। सामान्य कक्षाओं के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को भी सहयोग मिलेगा।
छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी के दैनिक अखबार, साथ ही परीक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण पत्रिकाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
सरकार का मानना है कि इन छात्रावासों के निर्माण से आदिवासी छात्र-छात्राओं की शिक्षा में निरंतरता आएगी और वे आर्थिक व सामाजिक बाधाओं से मुक्त होकर आगे बढ़ सकेंगे।
यह पहल न केवल शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाएगी, बल्कि आदिवासी समाज को आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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