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अंश और अंशिका पहुंच गए रांची, 12 दिनों की तलाश का अंत; मासूमों की इस किडनेपिंग की पूरी टाइमलाइन

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डिजिटल डेस्क, रांची। झारखंड की राजधानी रांची के धुर्वा इलाके से 2 जनवरी को लापता हुए भाई-बहन अंश और अंशिका को आखिरकार आज सकुशल बरामद कर लिया गया है। रामगढ़ जिले के चितरपुर स्थित अहमदनगर (पहाड़ी) इलाके से बच्चों को छुड़ाया गया, जहां एक दंपति उन्हें छिपाकर रखे हुए था। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो बिहार के औरंगाबाद के रहने वाले हैं और बच्चा चोरी करने वाले बुलगुलिया गिरोह से जुड़े बताए जा रहे हैं। बच्चों को रांची पहुंचा दिया गया है, जहां उनका परिवार इंतजार कर रहा था। इस मामले में पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) की मेहनत रंग लाई, लेकिन बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की सूचना ने निर्णायक भूमिका निभाई।

यह मामला बच्चों की सुरक्षा और अपहरण गिरोहों की सक्रियता पर सवाल उठाता है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी दंपति बच्चों को बिहार ले जाकर बेचने की फिराक में था, लेकिन पुलिस के डर से रामगढ़ में छिप गया। मामले की जांच जारी है, और झारखंड डीजीपी तड़ाशा मिश्रा आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में और डिटेल्स साझा कर सकती हैं। नीचे इस पूरे मामले का स्पष्ट टाइमलाइन दिया जा रहा है, जो उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है:
टाइमलाइन: किडनैपिंग केस में कब-कब क्या हुआ?

- 2 जनवरी 2026 (शुक्रवार): अंश (लगभग 5 वर्ष) और अंशिका (लगभग 4 वर्ष) दोपहर करीब 3 बजे धुर्वा के मौसी बाड़ी खटाल इलाके से घर से निकले थे, जहां वे बिस्किट खरीदने जा रहे थे। वे वापस नहीं लौटे। परिवार और पड़ोसियों ने तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

- 3 जनवरी 2026 (शनिवार): परिवार ने धुर्वा थाने में बच्चों के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत तलाश शुरू की, लेकिन शुरुआती दिनों में कोई सफलता नहीं मिली।

- 4-5 जनवरी 2026 (लगभग 10 दिन पहले): बिहार के औरंगाबाद निवासी एक युवक (करीब 25 वर्ष) और युवती (करीब 19 वर्ष) ने रामगढ़ जिले के चितरपुर स्थित अहमदनगर (पहाड़ी) में रोशन आरा नामक महिला के एस्बेस्टस वाले मकान का एक कमरा किराए पर लिया। किराया 1000 रुपये महीना तय हुआ। उन्होंने खुद को पति-पत्नी और बच्चों को अपना बताया। मकान मालकिन रोशन आरा ने पुलिस को बताया कि ठंड की वजह से उन्होंने आधार कार्ड देखकर इंसानियत के नाते कमरा दे दिया। आरोपी दंपति इससे पहले धुर्वा के शालीमार बाजार और आसपास बैलून बेचते हुए घूमता था, जहां से उन्होंने बच्चों को चुराया।

- 3-13 जनवरी 2026 (तलाश के दिन): रांची पुलिस ने एसएसपी राकेश रंजन की देखरेख में 40 सदस्यों वाली एसआईटी गठित की। 5,000 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की जांच की गई और 2,000 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। गंतव्य केयर फाउंडेशन एनजीओ की मदद से पोस्टर अभियान चलाया गया। 13 जनवरी को बच्चों को ढूंढने वाले को 4 लाख रुपये इनाम की घोषणा की गई। इस दौरान राजनीतिक पार्टियां (जैसे बीजेपी) और सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन किए, धुर्वा में बंद観察 किया गया। नैशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (एनसीपीसीआर) ने मामले का संज्ञान लिया और रिपोर्ट मांगी। आरोपी दंपति इस बीच बच्चों को चितरपुर में छिपाकर रखे हुए था, क्योंकि पुलिस के डर से बिहार नहीं जा सके।

- 3 जनवरी 2026 (मंगलवार शाम): सोशल मीडिया पर बच्चों के लापता होने की खबर वायरल होने के बाद बजरंग दल के कार्यकर्ता सचिन, डब्ल्यू साहू, सुनील कुमार, अंशु आदि ने आसपास के इलाकों में तलाश शुरू की।

- 14 जनवरी 2026 (बुधवार सुबह, करीब 1:02 PM तक): बजरंग दल कार्यकर्ताओं को चितरपुर के अहमदनगर से बच्चों के होने की सूचना मिली। उन्होंने मौके पर पहुंचकर बच्चों को बरामद किया और रामगढ़ पुलिस को सूचित किया। रजरप्पा थाना पुलिस ने दंपति को गिरफ्तार किया और बच्चों को कब्जे में लिया। बच्चों को पहले रामगढ़ एसपी आवास ले जाया गया, फिर रांची पहुंचाया गया। रामगढ़ एसपी अजय कुमार, एसडीपीओ परमेश्वर प्रसाद, रामगढ़ थाना प्रभारी नवीन प्रकाश पांडेय, रजरप्पा थाना प्रभारी कृष्ण कुमार ने घटनास्थल का दौरा किया। पूछताछ में आरोपी दंपति ने अपराध कबूल लिया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी बच्चों को बिहार के औरंगाबाद ले जाकर बेचने की तैयारी में थे। बच्चों की बरामदगी के बाद इलाके में भीड़ जमा हो गई।

पुलिस का कहना है कि आरोपी बुलगुलिया गिरोह के सदस्य हैं, जो घुमंतू जीवन जीते हैं और बच्चा चोरी में शामिल रहते हैं। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि दंपति यहां कैसे पहुंचा और उनकी मंशा क्या थी। बच्चों की सेहत ठीक है, और उन्हें परिवार को सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस मामले ने रांची में बच्चों की सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है। अधिक जानकारी के लिए पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस का इंतजार है।
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