अंडरवर्ल्ड डान अबू सलेम ने आजमगढ़ में भाई के चालीसवां के लिए मांगी 14 दिनों की पैरोल, पैतृक गांव में शुरू हुई चर्चा
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/14/article/image/abu-salem-1768378201237.jpgअबू सलेम के पैरोल की स्थिति स्पष्ट न होने से चालीसवें की तारीख तय नहीं हो पाई है, जिससे गांव में चर्चाएं तेज हैं।
जागरण संवाददाता, आजमगढ़। अंडरवर्ल्ड डान अबू सलेम ने अपने बड़े भाई के चालीसवें में शामिल होने के लिए आजमगढ़ के सरायमीर स्थित पठान टोला में अपने घर आने के लिए दो हफ्ते की पैरौल मांगी है। हालांकि, महाराष्ट्र सरकार ने इस अनुरोध का विरोध करते हुए पैरौल देने से मना कर दिया है। अबू सलेम वर्तमान में 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम ब्लास्ट मामले में सजा काट रहा है। इस बाबत परिजनों से संपर्क करने की कोशिश करने पर किसी से भी संपर्क नहीं हो सका। जबकि आजमगढ़ में पैतृक आवास बंद होने की वजह से किसी से संपर्क संभव नहीं हो सका। जबकि पड़ोसी भी कुछ भी बताने से परहेज करते रहे।
अबु सलेम के बड़े भाई, 55 वर्षीय अबू हकीम उर्फ चुनचुन अंसारी की बीमारी के कारण 14 नवंबर 2025 को इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी। भाई की मृत्यु का हवाला देते हुए अबु सलेम ने 14 दिनों की पैरौल मांगी है। महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई हाईकोर्ट को सूचित किया है कि सलेम एक अंतरराष्ट्रीय अपराधी है और उसे पुलिस सुरक्षा के साथ 14 दिनों की बजाय केवल आपातकालीन दो दिन की पैरौल दी जा सकती है। इसके साथ ही, पैरौल के दौरान होने वाले खर्च का वहन भी अबु सलेम स्वयं करेगा।
पैरौल मिलने की स्थिति स्पष्ट न होने के कारण अब तक चालीसवें का दिन तय नहीं हो पाया है। इससे पहले, अबू सलेम ने अक्टूबर 2007 में अपनी मां के निधन के समय एक दिन के लिए आजमगढ़ आकर उनके अंतिम संस्कार में भाग लिया था और फिर वापस लौट गया था। इसके बाद, मां के चालीसवें में शामिल होने के लिए भी उसने एक दिन की पैरौल पर सरायमीर लौटने का प्रयास किया था।
अबु सलेम के चार भाई हैं: अबू हाकिम, अबू सलेम, अबुल जैश और एजाज। अबू जैश लखनऊ में और एजाज आजमगढ़ के मुबारकपुर में निवास करते हैं। अबू हकीम सरायमीर के पठान टोला स्थित अपने मकान में रहते थे। हाकिम के एक बेटा और तीन बेटियां हैं। अबू सलेम की आने की संभावनाओं को देखते हुए गांव के लोगों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
नहीं मिल पा रही मदद : इस मामले में महाराष्ट्र सरकार का निर्णय और अबू सलेम की पैरौल की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मंगलवार को पैरोल नहीं मिल पाने की वजह से परिवार में इसकी चर्चा रही। अबू सलेम को अपने भाई के चालीसवें में शामिल होने की अनुमति को लेकर गांव में चर्चा खूब है। माना जा रहा है कि पैरोल मिती तो लंबे समय बाद अबू अपने पैतृक घर आएगा। अबु सलेम की पैरौल की मांग और उसके संभावित परिणामों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
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