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बलिया दुग्ध संघ का संकट गहराया, 308 समितियां बंद; बिहार की सुधा डेयरी को मिल रहा 60 हजार लीटर दूध

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सुधा डेयरी ने बलिया में 600 बूथ स्थापित किए हैं, जबकि पराग डेयरी पर किसानों और कर्मचारियों का करोड़ों बकाया है।



लवकुश सिंह, जागरण, बलिया। कभी प्रतिदिन 16 हजार लीटर दूध का उपार्जन करने वाला बलिया दुग्ध संघ आज खुद अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। अधिकारियों की उदासीनता और लगातार भुगतान न होने के कारण पराग डेयरी की बलिया इकाई एक जून 2025 से बंद हो चुकी है। जबकि वर्ष 2022 तक पराग डेयरी के द्वारा दूध कलेक्शन के लिए जनपद के हर रूट पर लगभग 25 गाड़ियां भेजी जाती थीं।

इससे पशुपालकों को सहूलियत थी। अब हालात यह हैं कि पराग डेयरी से संचालित 308 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां भी बंद हो चुकी हैं। ऐसे में सीमावर्ती क्षेत्रों के करीब 15 हजार पशुपालक रोजाना 60 हजार लीटर दूध बिहार की सुधा डेयरी को दे रहे हैं। सुधा डेयरी के द्वारा बलिया सहित मऊ और गाजीपुर तक अपने उद्योग का विस्तार किया गया है।

केवल बलिया में दूध कलेक्शन के लिए 600 बूथ स्थापित हैं। बैरिया तहसील क्षेत्र के सुपरवाइजर रोशन यादव ने बताया कि मनियर, बैरिया और चिलकहर में सुधा डेयरी की ओर से प्लांट भी स्थापित किया गया है। पराग डेयरी दिसंबर 2024 से मई 2025 तक पशुपालकों के 56 लाख रुपये का भुगतान भी नहीं कर सकी है।

डेयरी का भी जिला अस्पताल पर 98 हजार रुपये और दुग्ध संघ गोरखपुर पर 60 लाख रुपये लंबे समय से बकाया चल रहा है। दुग्ध संघ से जुड़े कर्मचारियों का लगभग 70 लाख रुपये वेतन बकाया है। जीराबस्ती में स्थित पराग डेयरी के प्लांट पर कभी पशुपालकों की सुबह से कतार लग जाती थी, अब वहां सन्राटा पसरा हुआ है।


बोले पशुपालक
अभी के समय में बिहार की डेयरी को दूध देते हैं। दूसरी कोई व्यवस्था भी नहीं है। बिहार की डेयरी पुशपालकों का ध्यान भी रखती है। बीच-बीच में डेयरी के द्वारा पशपुालकों को सम्मानित भी किया जाता है। -रंजन यादव, बहुआरा, बैरिया।

-बिहार की डेयरी में दूध देते हैं। पैसे का भुगतान 10 दिन पर हो जाता है। हालांकि सभी पशुपालक डेयरी को दूध नहीं देते हैं। कुछ मिठाई दुकानदारों और शहर में जाकर भी दूध की बिक्री करते हैं। -अनिल यादव, सेमरिया, बैरिया।




पशुपालकों के बकाया का भुगतान करने के लिए इधर करीब 16 लाख रुपये मिले हैं। दुग्ध संघ गोरखपुर को भी कई बार पत्र भेजा गया है लेकिन वह भुगतान नहीं कर रहे हैं। पशुपालकों के बकाया का भुगतान होने के बाद फिर से डेयरी को पुराने अंदाज में खड़ा किया जाएगा।
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डा. एके शर्मा, इकाई प्रभारी, आजमगढ़ दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड, विस्तार क्षेत्र मऊ-बलिया।
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