पलवल में नाबालिग को पीटने और करंट लगाने के आरोपी की मौत, स्वजन ने सड़क पर शव रख किया प्रदर्शन
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/14/article/image/palwal-news-1768387413345.JPGस्वजन ने शव रखकर किया प्रदर्शन।
जागरण संवाददाता, पलवल। बंचारी गांव में अनुसूचित जाति के नाबालिग बच्चे के साथ मारपीट और करंट लगाने के आरोपित राजेंद्र की मंगलवार रात को मौत हो गई। स्वजन ने आरोप लगाया कि मानसिक प्रताड़ना और झूठे मुकदमों के दबाव के कारण हार्ट अटैक आने से उनकी मौत हुई है।
मृतक के पुत्र ने मुंडकटी थाना में लिखित शिकायत देकर आरोपियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। मृतक राजेंद्र के स्वजन ने ग्रामीणों के साथ मिलकर बंचारी गांव में करीब एक घंटे तक शव रखकर प्रदर्शन भी किया और आरोपितों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की।
कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस के आश्वासन के बाद स्वजन माने और शव को राष्ट्रीय राजमार्ग 19 की सर्विस रोड से उठाकर एंबुलेंस के लिए जरिए पोस्टमार्टम के लिए जिला नागरिक अस्पताल पहुंचाया गया।
बंचारी गांव के रहने वाले शिक्षा विभाग में क्लर्क के रूप में कार्यरत मृतक के पुत्र जितेंद्र ने बताया कि इस विवाद की शुरुआत 10 दिसंबर 2025 की रात को हुई, जब गांव का ही आदित्य नाम का बच्चा अपने दो साथियों के साथ चोरी की नीयत से उनके घर में घुसा। स्वजन को इसका पता चल गया और उन्होंने उन्हें पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था।
आरोप है कि इसके बाद आदित्य की मां समेत अन्य लोगों ने कानून का दुरुपयोग करते हुए 13 दिसंबर 2025 को जितेन्द्र के परिवार पर एससी एक्ट और पाक्सो के तहत मुंडकटी थाने में मुकदमा दर्ज करवा दिया। जितेन्द्र का आरोप है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद खुद को अनुसूचित जाति का नेता बताने वाले जितेन्द्र चंदेलिया ने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से परिवार को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
आरोप है कि आरोपी ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, डीजीपी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध अभद्र भाषा का प्रयोग किया। प्रशासन पर दबाव बनाया और और उनके परिवार से मोटी रकम की मांग की गई। इस लगातार प्रताड़ना के कारण उसके दादा भीमसिंह को लकवा मार गया।
शिकायतकर्ता ने बताया कि उनका परिवार एक सामाजिक परिवार है। आरोपितों द्वारा समाज में उनकी इज्जत को तार-तार करने के कारण उनके पिता राजेन्द्र इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाए और उनकी मृत्यु हो गई। प्रताड़ना के डर से परिवार घर छोड़ने को भी मजबूर हो गया है। पीड़ित ने कहा कि उसकी मौत के जिम्मेदार वे लोग हैं, जिन्होंने उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाया और मानसिक शोषण किया।
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