सहकारी समितियों पर नहीं खाद, गेहूं में छिड़काव के लिए हो रही परेशानी, चक्कर लगा रहे किसान
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/14/article/image/13SIT_2_13012026_445-1768387740164-1768387776499-1768387790418.jpgजागरण टीम, सीतापुर। साधन सहकारी समितियों पर किसानों को खाद नहीं मिल रही है। अधिकांश जगहों पर समितियों में ताला लटक रहा है। समितियों के किसान चक्कर काट रहे हैं। गेहूं में छिड़काव के लिए इस समय यूरिया की मांग अधिक है। खाद न मिलने पर किसान निजी दुकानों से खरीद रहे हैं। जिले में 150 साधन सहकारी समितियां संचालित हैं। कुछ जगहों पर खाद है, वहां किसानों की भीड़ लग रही है।
दृश्य एक- किसान सेवा सहकारी समिति मिश्रिख में खाद नहीं है। समिति में ताला लटक रहा है। किसान महेश ने बताया कि कई दिन से समिति पर आ रहे हैं। यहां कोई नहीं मिल रहा। निजी दुकानों पर यूरिया तो है पर वहां महंगी देते हैं। इसलिए नहीं खरीदा। समिति पर कब यूरिया आएगी कोई नोटिस भी नहीं चस्पा की गई है। उनके जैसे कई किसान समिति पर आकर लौट गए हैं।
दृश्य दो- साधन सहकारी समिति कसमंडा में भी यूरिया उपलब्ध नहीं है। किसान सत्य प्रकाश सिंह ने बताया कि तीन किलोमीटर दूर से यूरिया लेने आए थे। दुर्गेश ने बताया कि समिति पर यूरिया न होने से दिक्कतें हो रही हैं। निजी दुकानों पर महंगी होने के साथ जिंक भी खरीदना पड़ रहा है। सचिव दिलीप अवस्थी ने कहा कि खाद आने पर वितरण करेंगे।
दृश्य तीन- साधन सहकारी समिति बीहट गौर में यूरिया उपलब्ध है। इसकी जानकारी मिलने के बाद सुबह ही किसान समिति खुलने से पहले पहुंच गए। किसान रामनरेश ने बताया कि जानकारी मिली तो समिति पर यूरिया के लिए आए हैं। गेहूं में छिड़काव करना है। समिति सचिव शिव कुमार सिंह ने बताया 500 बोरी यूरिया समिति पर उपलब्ध है। जिसका वितरण किसानों को किया जा रहा है।
नेवादा व अलाईपुर समिति बंद, किसान परेशान
अटरिया के अलाईपुर में भी साधन सहकारी समिति बंद चल रही है। किसान खाद के लिए निजी दुकानों पर निर्भर हैं। साधन सहकारी समिति नेवादा करीब दो वर्ष से बंद है। इसका संचालन न होने से किसानों को समस्या हो रही है। खैराबाद की साधन सहकारी समिति परसेहरा में भी खाद नहीं है। किसानों को निजी दुकानों से खरीदना पड़ रहा है। कमलापुर की साधन सहकारी समिति थाना पट्टी में यूरिया नहीं है।
खाद की पर्याप्त उपलब्धता है। साधन सहकारी समितियों पर खाद भेजी गई है। कुछ समितियों में हो सकता है अब तक नहीं पहुंची हो, वहां शीघ्र मिलने लगेगी।
-नवीन चंद्र शुक्ल, सहायक निबंधक सहकारिता
Pages:
[1]