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दिल्ली के इस इलाके में 600 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार, सड़कें समेत चमक उठेगा पूरा शहर

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यमुना पार के निवासियों को जल्द ही बुनियादी सुविधाओं की कमी से राहत मिलेगी। फाइल फोटो



सौरभ पांडे, पूर्वी दिल्ली। यमुना पार के लोगों की, जो लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं, समस्याएं जल्द ही हल होने वाली हैं। यमुना पार के दोनों जिलों में 600 करोड़ रुपये का विकास कार्य किया जाएगा। यमुना पार विकास बोर्ड की पहली बैठक अगले हफ्ते होनी है, जिसमें इन प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी जाएगी।

यह विकास बोर्ड, जो लंबे समय से निष्क्रिय था, उसे मौजूदा बीजेपी सरकार ने फिर से बनाया है। पहले साल में टूटी सड़कें, ओवरफ्लो होते सीवर और खराब पानी की पाइपलाइन जैसी समस्याओं को ठीक किया जाएगा।

आम आदमी पार्टी की सरकार ने 2020 में यमुना पार विकास बोर्ड को निष्क्रिय कर दिया था। इसके बाद बीजेपी सरकार ने इसे फिर से बनाया और गांधी नगर के विधायक अरविंदर सिंह लवली को इसका चेयरमैन नियुक्त किया। सरकार ने अपने पहले बजट में यमुना पार विकास बोर्ड के लिए 600 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।

बोर्ड की पहली बैठक अगले हफ्ते होनी है। बोर्ड का पहले साल का लक्ष्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना है। ज़्यादातर इलाकों में टूटी सड़कों के कारण लोगों को ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, खराब पानी की पाइपलाइन के कारण दूषित पानी की सप्लाई होती है। ओवरफ्लो होते सीवर से गंदगी और बदबू फैलती है। यह बजट इन सभी समस्याओं को हल करने पर खर्च किया जाएगा।
विधायकों से सुझाव लिए गए

बोर्ड के अधिकारियों ने यमुना पार के सभी विधायकों के साथ बैठकें की हैं और उनके सुझाव मांगे हैं। उन्होंने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों की सबसे जरूरी समस्याओं के बारे में जानकारी इकट्ठा की है ताकि इन मुद्दों को पहले हल किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि इन समस्याओं को हल करने के बाद आगे का विकास कार्य किया जाएगा। सभी विधायकों ने अपने सुझाव बोर्ड को सौंप दिए हैं।
अगले साल के लिए मल्टीलेवल पार्किंग

अधिकारियों का कहना है कि यह तय किया गया है कि अगले वित्तीय वर्ष में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कार्य किया जाएगा। मल्टीलेवल पार्किंग और फ्लाईओवर जैसे प्रोजेक्ट इस साल बोर्ड के एजेंडे में नहीं हैं। अधिकारी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि किसी भी इलाके में पार्किंग सुविधा बनाने से पहले सीवर और टूटी सड़कों जैसी बुनियादी समस्याओं को हल किया जाए।


यमुना रिवरफ्रंट इलाके को लंबे समय से विकास के मामले में नज़रअंदाज़ किया गया है। अब, सरकार ने यह साफ़ कर दिया है कि एक अलग डेवलपमेंट बोर्ड बनाकर और ₹600 करोड़ का बजट देकर इस इलाके के विकास को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता दी जा रही है। हमारा प्रयास है कि लोगों को सड़कों, सीवर, पानी और ट्रैफिक से जुड़ी बुनियादी समस्याओं से जल्द से जल्द राहत मिले। इसके लिए बोर्ड की पहली बैठक अगले हफ़्ते होगी।

- अरविंदर सिंह लवली, चेयरमैन, यमुना रिवरफ्रंट डेवलपमेंट बोर्ड


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