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आए दिन हादसों के बावजूद क्यों बिना मानक की चल रही हैं डबल डेकर स्लीपर बसें?

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बिना मानक डबल डेकर स्लीपर बसों का परिचालन। जागरण



संवाद सहयोगी, दरभंगा । दरभंगा से डबल डेकर स्लीपर बसों की परिचालन रोजाना बिना मानक की चल रही है। दिल्ली मोड बस स्टैंड, बिरौल, कुशेश्वरस्थान, सुपौल, मब्बी, बेनीपुर आदि जगहों से खुलने वाली डबल डेकर बस से लोग राजस्थान, दिल्ली, मुंबई आदि शहरों की असुरक्षित यात्रा करने को मजबूर हैं।

पहले लंबी दूरी की यात्रा के लिए स्लीपर बसें आरामदायक, सस्ती और तेज मानी जाती थीं। लेकिन, आए दिन हो रही दुर्घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सुरक्षा, नियमों की अनदेखी और स्लीपर बसों में बढ़ रही खराबी एक गंभीर समस्या बन गई है।

भारत के बस बाडी कोड एआईएस-052 के अनुसार स्लीपर बसों में कई सख्त सुरक्षा मानक जरूरी हैं, कई आपातकालीन दरवाजे, छत पर निकास मार्ग, आग रोकने वाली सामग्री आदि, जिन्हें संशोधित एआईएस-119 मानक में भी शामिल किया गया है। लेकिन, कई स्लीपर बसें इन नियमों की खुली अवहेलना कर रही है।

दरअसल, सामान्य सीट वाली बसों को अवैध स्थानीय वर्कशाप में स्लीपर में बदल दिया जाता है, जिससे सुरक्षा मानक ही खत्म हो जाता है। अधिकतर संचालक ज्यादा बर्थ लगाने के लिए आपातकालीन निकास को बंद या ढक देते हैं। आग बुझाने की व्यवस्था नहीं होती, खिड़कियां आसानी से नहीं टूटती है।

कई निकास इतने संकरे होते हैं कि आग लगने पर बाहर निकलना लगभग असंभव हो जाता है। लेकिन, यात्रियों से डबल डेकर यथा स्लीपर बस का किराया वसूला जाता है। वह भी कई बसें बिना परमिट के लंबी दूरी तय करती है। बावूजद, कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। जिला मोटर वाहन ऐसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन खट्टीक ने बताया कि स्लीपर बस की कीमत 50 लाख से अधिक है ।

यहीं कारण है कि कुछ लोग बिना मानक के बस चला रहे हैं। ऐसे दरभंगा में एक दर्जन से अधिक स्लीपर का परिचालन हो रहा है। कई तो बिना परमिट के भी चल रहे हैं। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए।
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